Type Here to Get Search Results !

Action Movies

Bottom Ad

हाईब्रिड का आया जमाना,लुप्त होती देशी प्रजाति के बीज


मोजीम खान
 सिंहपुर,अमेठी- आजकल धान की नर्सरी लगाने का कार्य जोरों से चल रहा है और बीज की दुकानों पर धान के बीज खरीदने वालों की भीड़ लगी है।एक जमाना था जब बीज जल्दी खरीदना नहीं पड़ता था बल्कि घर का बीज ही बोने एवं नर्सरी डालने के काम आ जाता था लेकिन उस समय आज वाला हाईब्रिड बीज नहीं होता था जब कि प्रजातियाँ सभी तरह की होती थी। हाँ इतना जरूर था कि इन घरेलू अथवा देशी बीजों की पैदावार उतनी नहीं थी जितनी आजकल के हाईब्रिड बीज की है। जबसे हाईब्रिड का जमाना आ गया है तबसे हमारी मूल देशी बीज की प्रजातियाँ लुप्त होने लगी हैं और हर बार बीज खरीदना पड़ता है। हाईब्रिड बीजों के उत्पाद का इस्तेमाल दुबारा बीज के रूप में नहीं किया जा सकता है इसलिए हर बार खरीदना किसानाे की मजबूरी बन गया है।हाईब्रिड बीज से उत्पादित अनाज भले ही कम मूल्य पर बिकता हो लेकिन हाईब्रिड बीजों के मूल्य दस गुना अधिक होते हैं। हाईब्रिड बीजों के नाम पर आज तमाम कम्पनियां बीज उत्पादित करके उन्हें बेचने में जुटी हैं और किसानों को आकर्षित करने के लिए करोड़ों रुपये उसके प्रचार प्रसार पर खर्च कर किसानों को कम्पनियाँ अपने और आकर्षित कर रहे हैं। कोई भी कम्पनी अपने बीज को दूसरी कम्पनी के बीज से कमजोर नहीं बल्कि सबसे उत्तम बताती है।इस समय किसान को धान की नर्सरी डालने के लिए एक मोटी रकम का इंतजाम करना पड़ रहा है।अब तो सरकार भी इन्हीं कम्पनियों के बीज अनुदान पर किसानों को उपलब्ध कराने लगी है लेकिन सरकार की इस नयी बीज नीति का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है।अब तक सरकारी गोदाम पर अनुदानित बीज सीधे मिल जाता था लेकिन अब बीज लेने वालों को पहले आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है।बीज के पूरे दाम देने पड़ते हैं और अनुदान राशि के लिए इंतजार करना पड़ता है।किसान पैसे से ही कमजोर होता है और उसके लिये दो ढाई तीन रूपये किलो में खरीदना बहुत कठिन होता है।कच्चा एक बीघा खेत के लिये कम से कम दो किलो बीज की जरूरत पड़ती है क्योंकि जितने पौध एक साथ खेत में रोपे जायेगें उतने ही किलो बीज की जरूरत होती है। किसान धीरे धीरे हाईब्रिड बीजों पर निर्भर होता जा रहा है और अपने मूल बीजों को गायब करता जा रहा है जो अपने हाथ अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।अगर एक साल या एक सीजन बीज बनाने वाले हड़ताल कर दें तो किसान विकल्प के अभाव में फुटपाथ पर आ सकता है।वैसे अबतक किसानों को सरकार के विभिन्न राजकीय बीज उत्पादन एवं शोध केन्द्रों से उत्पादित देशी उन्नतशील बीज सस्ते मूल्य पर बीज मिल जाता था लेकिन आजकल वह भी मंहगा हो गया है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Below Post Ad

Comedy Movies

5/vgrid/खबरे