रमेश कुमार मिश्र/बेदप्रकाश मिश्र
गोण्डा।शासन व प्रशासन के उदासीनता के कारण टेढ़ी नदी मौत और जिन्दगी के बीच झूल रही है।कब इसका अस्तित्व खत्म हो जाय कुछ पता नही।क्योकि भूमाफियाओ व राजनेताओ के कारण आज टेढ़ी नदी सिकुड़ते हुए एक नाले के रूप में तबदील हो चुकी है।
बताते चले कि यूपी के बहराइच जिले से निकली और गोंडा मध्य से होकर गुजरती टेढ़ी नदी अयोध्या के सरयू नदी में मिलती है। जिसका अस्तित्व खत्म होने के कगार पर हो गया है। अनुमानतः लगभग 105 किलोमीटर लंबी टेढ़ी नदी अपने आसपास के 800 ग्राम पंचायतों को अनवरत काल से सिंचाई की सुविधा,
पशुओं के पेयजल की सुविधा, लाखों रुपए की मछली का व्यवसाय,आदि होरहा था।जो नदी के सूखने के कारण समाप्त हो गया है। टेढ़ी नदी के किनारे बंसे गांवो के लोग प्रायः रबी एवं जायद की फसलों की सिंचाई करके फसल का भरपूर लाभ उठाते थे।और पशुओ के लिए पानी की पूरी व्यवस्था भरपूर पूरे वर्ष बनी रहती थी।जो लगभग समाप्त हो चुकी है।मछली का व्यवसाय करने वाले लोग लाखो रूपये कमाते थे।और सरकार को फायदा होता था।नदी के सूख जाने से सरकार को लाखों रूपये की सलाना राजस्व क्षति भी हो रही है।
विगत कई वर्षों से बरसात ना होने के कारण नदी के कुछ स्थानों पर खरपतवार ऊगे हुए है जिससे ये नही पता चलता की नदी कहा है।कही कही तो जंगली जानवरों की लाशों पट्टी पड़ी है जिससे नदी में प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है।बरसात के समय कुछ जान भले ही आ जाती है नदी में।और तो और जहाँ पूरे वर्ष पानी भरा रहता था वहाँ भू माफियाओ की सक्रियता से नदी की पटाई करके फसल बोई जारही है।और अपने आसपास के निचले सतह पर बोई गई फसल को जहां नुकसान पहुंचाती थी। वहाँ अब धान और गेंहूँ की फसल लहलहा रही है।या यू कहे की नदी की धारा में ही फसल पैदा होरही है।नदी के कुछ हिस्सों में थोड़े बहुत पानी में जलकुम्भी, सेवार , लाशों की राखी तथा जानवरों के लाश से पटने से पानी प्रदूषित हो गया है।सफाई ना होने से गन्दा पानी जंगली जानवर एवं पशु पक्षी पी रहे है।और प्रदूषित पानी पीकर मौत के घाट उतर रहे हैं ।इस सब के बावजूद नदी के किनारे समसान स्थल बनाकर आज भी सौदाह की क्रिया की जा रही है। लोग अधजली लाशों को खुले आम सूखी नदी के तट पर फेंक कर चले जाते हैं ।तत्कालीन सरकार ने नदी के सफाई का बीड़ा उठाया था लेकिन भष्टाचार के कारण वो भी समाप्त हो गया।जबकि प्रदूषण से जनमानस को क्षति हो रही है। क्षेत्रीय लोगों ने सरकार से मांग की है। कि नदी से जुड़े क्षेत्र के विशिष्ट लाभों को देखते हुए नदी की सफाई जमीन शिल्ट निष्कासन कराकर पानी की व्यवस्था भविष्य में कराने के प्रति कार्यवाही करें।
क्षेत्र के दक्षिणी टेढ़ी नदी तिवारी बाजार, सुसेला, खानपुर ,सेजिया, रेतादल सिंह,धौरहरा घाट, सीसव,असरथा, पुरैनी,घाचा,खोजनपुर, रांगी,सरवा आदि माझा क्षेत्र के दर्जनों गावों से होती हुई सरयू नदी में मिल रही है । वही उत्तरी टेढ़ी नदी नारायनपुर,सिंगहा ,सेझिया,रामपुर,मझारा,अकबरपुर, गौहनी, गेडसर,दुर्जनपुर,रानीपुर,घोपतपु र होते हुए। सरयू नदी में मिल रही हैं। जिसके साफ सफाई के लिए क्षेत्रीय लोगों ने क्षेत्रीये जनप्रतिनिधियों से सफाई की मांग की है।



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