सुनील उपाध्याय
बस्ती । साहित्य के क्षेत्र में बस्ती का स्थान बहुत ऊंचा है। यह अच्छी बात है कि नई पीढी सृजन की उस धारा को और ऊर्जावान बना रही है। यह विचार वरिष्ठ कवि साहित्यकार अष्टभुजा प्रसाद शुक्ल ने प्रेस क्लब मंें रामचन्द्र ‘राजा’ कृत काव्य संग्रह ‘अमृत वर्षा’ का लोकार्पण करते हुये मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किया।
कहा कि रामचन्द्र ‘राजा’ के रचना संस्कार में धर्म, प्रकृति, मनुष्य के द्वंद और उत्थान की दशा दिशा है। मैं हूं वृक्ष धरा की शोभा, आउं सबके काज, बाह न काटो तुम मेरी, हे मानव सरताज। वे गुरू, प्रकृति सत्ता के प्रति समर्पित है। रामचन्द्र ‘राजा’ समर्थ कवि है और भविष्य के लिये आश्वस्त करते हैं।
प्रेमचंद साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान द्वारा आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम को दिनेश चन्द्र पाण्डेय, डा. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ श्याम प्रकाश शर्मा, विनोद कुमार उपाध्याय, नरेश कुमार सदाना, अफजल हुसेन अफजल, ओम प्रकाश पाण्डेय आदि ने रामचन्द्र ‘राजा’ कृत काव्य संग्रह ‘अमृत वर्षा’ के विविध पक्षों पर विमर्श करते हुये कहा कि रामचन्द्र ‘राजा’ की कविताओं में विविधताओं का व्यापक संसार है। ‘ प्रेम करिश्मा देख लो, सदा रहे वह संग, उसकी मर्जी से चले सबका अंग प्रत्यंग। वे संभावनाओं के रचनाकार है। शायर ताजीर बस्तवी ने कुछ यूं कहा ‘ तो अपने ऐब पे सब लोग क्यू न इतराये, चलन रहा ही नहीं आईना दिखाने का। अमृत वर्षा साहित्य जगत को आईना दिखाने की भूमिका निभायेगी।
अध्यक्षता करते हुये वरिष्ठ कवि सत्येन्द्रनाथ ‘मतवाला’ ने कहा कि श्रद्धा सुमन काव्य संकलन के बाद रामचन्द्र ‘राजा’ के दूसरे काव्य संग्रह ‘अमृत वर्षा’ में उनका कवि और अधिक परिपक्व हुआ है। ‘विपदा के अधियार में, सूझे न कुछ और, सत्य से नाता टूटता, अपने बनते गैर। वे मनुष्य जीवन के संघर्षो को सटीक शव्द देते हैं।
रामचन्द्र ‘राजा’ ने अतिथियों का स्वागत करते हुये कहा कि उनकी कविता का उद्देश्य मानव समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना है। स्वतः प्रेरणा के भाव कविता का रूप बनकर सामने आ जाते हैं।
कार्यक्रम में आतिश सुल्तानपुरी, सुमेश्वर यादव, दशरथ प्रसाद यादव, राम कृष्ण पाण्डेय, हरीश दरवेश, कलीम वस्तवी, लालमणि प्रसाद, विकास भट्ट, रहमान अली रहमान, सागर गोरखपुरी, शाहिद बस्तवी, जे.पी. भावुक, परमेश्वर प्रसाद, मिल्लू प्रसाद, पंकज सोनी, दीपक प्रसाद, पारसनाथ, अमरदीप आदि उपस्थित रहे।


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