अखिलेश्वर तिवारी
नील बाग पैलेस में दर्शनार्थ रखा गया पार्थिव शरीर
श्रद्धांजलि देने वालों का लगा तांता
मंगलवार को राप्ती के राज घाट पर किया जाएगा अंतिम संस्कार
बलरामपुर ।। बलरामपुर स्टेट के वर्तमान महाराज धर्मेंद्र प्रसाद सिंह के आकस्मिक निधन के बाद जनपद बलरामपुर में शोक की लहर व्याप्त हो गई है । रविवार की शाम लखनऊ में दिल का दौरा पड़ने के कारण उस समय उनका निधन हो गया था
जब वह शालीमार मार्केट में आवश्यक खरीददारी करने गए हुए थे उनका पार्थिव शरीर आज शाम बलरामपुर जिला मुख्यालय के नील बाग पैलेस लाया गया जहां उन्हें जनता के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है अपने स्वर्गीय महाराज के दर्शन तथा श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में लोग निवास पैलेस बहुत कम श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं नील बाग पैलेस के प्रबंधक बृजेश सिंह के अनुसार स्वर्गीय महाराज का अंतिम संस्कार सोमवार की दोपहर राप्ती नदी के बगल स्थित राजघाट पर किया जाएगा इसी जगह पर उनके पूर्वजों का भी अंतिम संस्कार किया गया है
उन्होंने बताया कि सोमवार की सुबह लगभग 10:00 बजे स्वर्गीय महाराज की शोभायात्रा निकाली नील बाग पहले से निकाली जाएगी और शव यात्रा नील भाग पहले से निकलकर संतोषी माता मंदिर होते हुए वीर विनय चौक से मुख्य बाजार होता हुआ पुराने चौक मेजर चौराहा से सिटी पैलेस होता हुआ एम एल के पीजी कॉलेज ग्राउंड में पहुंचेगा जहां पर कुछ देर जनता के दर्शन के लिए रुकने के बाद राप्ती नदी पर स्थित राजघाट पर ले जाया जाएगा जहां पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा ।
जब वह शालीमार मार्केट में आवश्यक खरीददारी करने गए हुए थे उनका पार्थिव शरीर आज शाम बलरामपुर जिला मुख्यालय के नील बाग पैलेस लाया गया जहां उन्हें जनता के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है अपने स्वर्गीय महाराज के दर्शन तथा श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में लोग निवास पैलेस बहुत कम श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं नील बाग पैलेस के प्रबंधक बृजेश सिंह के अनुसार स्वर्गीय महाराज का अंतिम संस्कार सोमवार की दोपहर राप्ती नदी के बगल स्थित राजघाट पर किया जाएगा इसी जगह पर उनके पूर्वजों का भी अंतिम संस्कार किया गया है
उन्होंने बताया कि सोमवार की सुबह लगभग 10:00 बजे स्वर्गीय महाराज की शोभायात्रा निकाली नील बाग पहले से निकाली जाएगी और शव यात्रा नील भाग पहले से निकलकर संतोषी माता मंदिर होते हुए वीर विनय चौक से मुख्य बाजार होता हुआ पुराने चौक मेजर चौराहा से सिटी पैलेस होता हुआ एम एल के पीजी कॉलेज ग्राउंड में पहुंचेगा जहां पर कुछ देर जनता के दर्शन के लिए रुकने के बाद राप्ती नदी पर स्थित राजघाट पर ले जाया जाएगा जहां पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा ।
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| स्वर्गीय महाराज धर्मेंद्र प्रसाद सिंह |
जानकारी के अनुसार बलरामपुर का नाम पूरे देश में राज परिवार द्वारा किए गए कार्यों के कारण विख्यात है । बलरामपुर राज परिवार द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा तथा धार्मिक कार्यों के लिए बहुत सारे कार्य कराए गए हैं । समाज के उत्थान के लिए भी बलरामपुर राज परिवार हमेशा से आगे रहा है । आजादी के पहले हो या फिर आजादी के बाद बलरामपुर राजपरिवार का योगदान जिले के विकास में खासी भूमिका निभाता रहा है ।
जिला मुख्यालय पर आज जितने भी इंटर कॉलेज तथा डिग्री कॉलेज व अस्पताल तथा मंदिर हैं वह सब स्टेट के जमाने के ही हैं । महाराजा धर्मेंद्र प्रसाद सिंह का जन्म 1958 में बहराइच जिले के गंगवल स्टेट के राजा कुंवर भरत सिंह के यहां हुआ था ।
बलरामपुर स्टेट के महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद सिंह के कोई संतान नहीं थी और उन्होंने धर्मेंद्र प्रसाद सिंह को 6 वर्ष की आयु में 1964 में गोद लिया था । गोद लेने के कुछ ही समय बाद 1964 में ही पाटेश्वरी प्रसाद सिंह का आकस्मिक निधन हो गया जिसके बाद धर्मेंद्र प्रसाद सिंह को केवल 6 वर्ष की आयु में 1964 में राजगद्दी का भार सौंपा गया था । हालांकि उनके बालिग हो जाने तक उनकी मां महारानी विजयलक्ष्मी राजकाज का भार संभाल रही थी । वर्ष 1980 में धर्मेंद्र प्रसाद का विवाह नेपाल राष्ट्र के जंग बहादुर राणा की पुत्री वंदना राजलक्ष्मी के साथ संपन्न हुआ और इसी वर्ष 29 दिसंबर 1980 को उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिनका नाम जयेंद्र प्रताप सिंह रखा गया ।
कुंवर जायेंद्र प्रताप सिंह ही वर्तमान समय में उनके उत्तराधिकारी हैं । 1984 में 21 अप्रैल को उन्हें कन्या रत्न की प्राप्ति हुई जिनका नाम महाराज कुमारी विजय श्री रखा गया । बालिग हो जाने के बाद उन्होंने राज परिवार का दायित्व संभाला और तब से निरंतर अपने पूर्वजों की धरोहर व उनके शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने न सिर्फ अपनी रियासत की खोई हुई तमाम संपत्तियों को अपने कब्जे में लिया बल्कि समाज के लिए भी उन्होंने बहुत सारे सराहनीय कार्य किए । दैवीय आपदा हो या फिर कोई धार्मिक आयोजन, गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी से लेकर पढ़ाई तक सभी में उन्होंने बराबर का सहयोग दिया ।
देश के सभी भागों में बलरामपुर राज परिवार द्वारा बनाए गए मंदिर धर्मशाला विद्यालय तथा अस्पताल आज भी विद्यमान है ।प्रदेश की राजधानी लखनऊ में केजीएमसी मेडिकल कॉलेज के निर्माण में लगी लागत का आधा खर्च राज परिवार द्वारा उठाया गया था । लखनऊ का मोती महल, बलरामपुर हॉस्टल, बारादरी, बलरामपुर गार्डन तथा बलरामपुर हॉस्पिटल राजपरिवार के कार्यों की याद दिलाते हैं । प्रदेश में जब कहीं भी रेजिडेंशियल हॉस्पिटल नहीं थे तब महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद सिंह बलरामपुर हॉस्पिटल का निर्माण लखनऊ में कराया था ।
इसी प्रकार जिला मुख्यालय पर यहां की जनता की सुविधा के लिए 108 मंदिरों का निर्माण राज परिवार द्वारा कराया गया । आधा दर्जन इंटर कॉलेज तथा तराई का एक्सफोर्ड कहे जाने वाले एम एल के पीजी कॉलेज का निर्माण भी राज परिवार द्वारा ही 1955 मे कराया गया था । आज से सैकड़ों वर्ष पुर्व जब लड़कियों की शिक्षा नाम मात्र ही होगी उस समय बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण बलरामपुर जिला मुख्यालय पर कराया गया था ।
इतना ही नहीं महामना मदन मोहन मालवीय के एक छोटी सी आग्रह पर बलरामपुर राज परिवार द्वारा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की 16 किलोमीटर लंबी चारदीवारी का निर्माण कराया गया था । इसके साथ ही महिला चिकित्सालय तथा पुरुष चिकित्सालय का निर्माण अलग-अलग करा कर वहां पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की गई थी । इससे स्पष्ट होता है कि बलरामपुर राज परिवार हमेशा से ही शिक्षा के लिए काफी जागरूक रहा है तथा लोग स्वस्थ रहें इसके लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं । लोगों के अंदर धार्मिक भावनाएं बरकरार रहे इसके लिए उन्होंने पर्याप्त मंदिरों का निर्माण कराया था ।
बलरामपुर के लोगों को बिजली सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बलरामपुर स्टेट द्वारा पावर जनरेशन प्लांट लगाकर विद्युत उत्पादन कराया जाता था और यहीं से बलरामपुर के साथ-साथ गोंडा तथा बहराइच में विद्युत सप्लाई दी जाती थी जो निर्बाध चौबीसों घंटे लोगों को मिलती थी । महाराजा धर्मेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने पूर्वजों की विरासत को संभालते हो उसे आगे बढ़ाया और अपने सरल स्वभाव के कारण ही हुए आम जनता के बीच आज भी लोकप्रिय बने हुए हैं । उनके निधन के बाद से ही पूरे जिले के लोग हस्तप्रद हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए नील बाग पैलेस पर पार्थिव शरीर के आते ही भारी भीड़ जुटने लगी और श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है लोग वहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं ।
जिला मुख्यालय पर आज जितने भी इंटर कॉलेज तथा डिग्री कॉलेज व अस्पताल तथा मंदिर हैं वह सब स्टेट के जमाने के ही हैं । महाराजा धर्मेंद्र प्रसाद सिंह का जन्म 1958 में बहराइच जिले के गंगवल स्टेट के राजा कुंवर भरत सिंह के यहां हुआ था ।
बलरामपुर स्टेट के महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद सिंह के कोई संतान नहीं थी और उन्होंने धर्मेंद्र प्रसाद सिंह को 6 वर्ष की आयु में 1964 में गोद लिया था । गोद लेने के कुछ ही समय बाद 1964 में ही पाटेश्वरी प्रसाद सिंह का आकस्मिक निधन हो गया जिसके बाद धर्मेंद्र प्रसाद सिंह को केवल 6 वर्ष की आयु में 1964 में राजगद्दी का भार सौंपा गया था । हालांकि उनके बालिग हो जाने तक उनकी मां महारानी विजयलक्ष्मी राजकाज का भार संभाल रही थी । वर्ष 1980 में धर्मेंद्र प्रसाद का विवाह नेपाल राष्ट्र के जंग बहादुर राणा की पुत्री वंदना राजलक्ष्मी के साथ संपन्न हुआ और इसी वर्ष 29 दिसंबर 1980 को उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिनका नाम जयेंद्र प्रताप सिंह रखा गया ।
कुंवर जायेंद्र प्रताप सिंह ही वर्तमान समय में उनके उत्तराधिकारी हैं । 1984 में 21 अप्रैल को उन्हें कन्या रत्न की प्राप्ति हुई जिनका नाम महाराज कुमारी विजय श्री रखा गया । बालिग हो जाने के बाद उन्होंने राज परिवार का दायित्व संभाला और तब से निरंतर अपने पूर्वजों की धरोहर व उनके शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने न सिर्फ अपनी रियासत की खोई हुई तमाम संपत्तियों को अपने कब्जे में लिया बल्कि समाज के लिए भी उन्होंने बहुत सारे सराहनीय कार्य किए । दैवीय आपदा हो या फिर कोई धार्मिक आयोजन, गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी से लेकर पढ़ाई तक सभी में उन्होंने बराबर का सहयोग दिया ।
देश के सभी भागों में बलरामपुर राज परिवार द्वारा बनाए गए मंदिर धर्मशाला विद्यालय तथा अस्पताल आज भी विद्यमान है ।प्रदेश की राजधानी लखनऊ में केजीएमसी मेडिकल कॉलेज के निर्माण में लगी लागत का आधा खर्च राज परिवार द्वारा उठाया गया था । लखनऊ का मोती महल, बलरामपुर हॉस्टल, बारादरी, बलरामपुर गार्डन तथा बलरामपुर हॉस्पिटल राजपरिवार के कार्यों की याद दिलाते हैं । प्रदेश में जब कहीं भी रेजिडेंशियल हॉस्पिटल नहीं थे तब महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद सिंह बलरामपुर हॉस्पिटल का निर्माण लखनऊ में कराया था ।
इसी प्रकार जिला मुख्यालय पर यहां की जनता की सुविधा के लिए 108 मंदिरों का निर्माण राज परिवार द्वारा कराया गया । आधा दर्जन इंटर कॉलेज तथा तराई का एक्सफोर्ड कहे जाने वाले एम एल के पीजी कॉलेज का निर्माण भी राज परिवार द्वारा ही 1955 मे कराया गया था । आज से सैकड़ों वर्ष पुर्व जब लड़कियों की शिक्षा नाम मात्र ही होगी उस समय बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण बलरामपुर जिला मुख्यालय पर कराया गया था ।
इतना ही नहीं महामना मदन मोहन मालवीय के एक छोटी सी आग्रह पर बलरामपुर राज परिवार द्वारा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की 16 किलोमीटर लंबी चारदीवारी का निर्माण कराया गया था । इसके साथ ही महिला चिकित्सालय तथा पुरुष चिकित्सालय का निर्माण अलग-अलग करा कर वहां पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की गई थी । इससे स्पष्ट होता है कि बलरामपुर राज परिवार हमेशा से ही शिक्षा के लिए काफी जागरूक रहा है तथा लोग स्वस्थ रहें इसके लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं । लोगों के अंदर धार्मिक भावनाएं बरकरार रहे इसके लिए उन्होंने पर्याप्त मंदिरों का निर्माण कराया था ।
बलरामपुर के लोगों को बिजली सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बलरामपुर स्टेट द्वारा पावर जनरेशन प्लांट लगाकर विद्युत उत्पादन कराया जाता था और यहीं से बलरामपुर के साथ-साथ गोंडा तथा बहराइच में विद्युत सप्लाई दी जाती थी जो निर्बाध चौबीसों घंटे लोगों को मिलती थी । महाराजा धर्मेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने पूर्वजों की विरासत को संभालते हो उसे आगे बढ़ाया और अपने सरल स्वभाव के कारण ही हुए आम जनता के बीच आज भी लोकप्रिय बने हुए हैं । उनके निधन के बाद से ही पूरे जिले के लोग हस्तप्रद हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए नील बाग पैलेस पर पार्थिव शरीर के आते ही भारी भीड़ जुटने लगी और श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है लोग वहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं ।


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