Type Here to Get Search Results !

Action Movies

Bottom Ad

बेल्हा के साहित्यिक क्षेत्र के प्रेरणा स्रोत व गज़लों के बेताज बादशाह थे नीरज




शिवेश शुक्ला 
 प्रतापगढ़ । महाकवि गोपालदास नीरज की इन दो पंक्तियों ने भी  क्या कभी सोचा होगा कि वह किसी के जीवन की प्रेरणा बनने जा रही हैं और कुछ ऐसा ही हुआ संचेतना के संस्थापक दयाशंकर शुक्ल हेम जी के साथ । महाकवि  गोपालदास नीरज जी के जीवन पर आयोजित शोकसभा में बोलते हुए श्री शुक्ल ने कहा कि सर्वप्रथम 1965 में मैंने उनको इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सुना और बार बार सुनने की उन्हें प्रेरणा जागी, और जहॉ  उन्होंने प्यार अगर थमता ना पथ में, उंगली इस बीमार उम्र की । हर पीड़ा वेश्या बन जाती, हर आंसू आवारा होते ।। इन लाइनों ने इतना प्रभावित किया कि नीरज जी को सुनने के लिए संचेतना का पहला आयोजन प्लाजा पैलेश मे जो उस समय विद्युत विभाग का कार्यालय हुआ करता था उसी में किया गया।जहॉ  1965 में गोपालदास नीरज जी समशद मिनाई अजमत सुल्तानपुरी जैसे शायरो के साथ उपस्थित हुए और यह कार्यक्रम आज तक जारी है । संचेतना का 51वॉ कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न हुआ जिसके प्रेरणा स्रोत गोपालदास नीरज जी रहे । संचेतना के मंच पर पुनः 1968 में तिलक इंटर कॉलेज के मैदान में व 1975 में 1979 में 1982 में तथा 1995 में जीआईसी कॉलेज के मैदान पर अपने गीतों के जादू को बिखेरते रहे तथा मेरे संस्मरण में प्रतापगढ़ की धरती पर आखिरी आगमन सपा शासनकाल  मैं हरिवंशराय बच्चन जी के जन्म स्थली बाबू पट्टी में आयोजित कार्यक्रम में हुआ जहां मेरी अध्यक्षता को देखते हुए वह बहुत प्रसन्न हुए थे । शोक सभा में लोगो ने कहा कि नीरज जी विशुद्ध रूप से हिंदी गीतों व गज़लों के बेताज बादशाह थे आज उनके जाने से इस धरती का एक बड़ा सितारा हमने खो दिया है । उक्त अवसर पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में हरिशंकर सिंह, अनूप अनुपम, गजेंद्र सिंह विकट, अहमद,  शीतला सुजान, राकेश कनौजिया, धर्मशील, रविंद्र अजनवी,  विनय शुक्ला सहित आदि मौजूद रहे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Below Post Ad

Comedy Movies

5/vgrid/खबरे