सुनील उपाध्याय
बस्ती । सर्वण लिबरेशन फ्रण्ट के राष्ट्रीय संयोजक दीनदयाल त्रिपाठी ने कहा है कि 2 लाख तक आय वाले अभिभावकों के पाल्यों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर दिये जाने वाले शुल्क प्रतिपूर्ति में कटौती किसी भी रूप में स्वीकार्य नही है।
प्रदेश सरकार के निर्णय की कड़े शव्दों में निन्दा करते हुये दीन दयाल त्रिपाठी ने कहा कि मेधा अध्यक्ष पूर्व आइएएस स्व. लक्ष्मीकान्त शुक्ल ने कक्षा 10 से उच्च शिक्षा तक छात्रों की सुविधा के लिये सरकार से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक लम्बी लडाई लड़ी, निलम्बित भी हुये किन्तु हिम्मत नहीं हारे और विजेता बनकर उभरे। मेधा पार्टी और सर्वण लिबरेशन फ्रण्ट छात्र हितों के सवाल पर आर-पार का संघर्ष करेगा। कहा कि यह कहना गलत है कि केवल 50 हजार रूपये तक की शुल्क प्रतिपूर्ति दिया जाता रहा है। अनेकों ऐसे उदाहरण है जब छात्रों को 19 लाख ढाई हजार रूपये तक को वापस कराया गया।
एसएलएफ नेता ने कहा कि प्रदेश सरकार जान बूझकर सामान्य, पिछडा, अल्पसंख्यक वर्ग के गरीब छात्रों से शुल्क प्रतिपूर्ति का अवसर छीन लेना चाहती है जिससे वे उच्च शिक्षा ग्रहण न कर सकें किन्तु इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। आगामी 7 अगस्त को होने वाले एस.एल.एफ. के प्रदर्शन में इस मुद्दे को भी प्रभावशाली ढंग से उठाया जायेगा।

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