शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ़। रामपुर संग्रामगढ़ विकासखण्ड के पूरे अनिरूद्ध गांव मे प्राथमिक विद्यालय के गेट भरभराकर ढह जाने से कक्षा दो के सात वर्षीय मासूम छात्र की मौत को भले ही बेल्हा का प्रशासन हल्के मे लेने के अंदाज मे खडा है। बावजूद इसके कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की अपनी सरकार को जनता के बीच मे प्रभावी बनाने के लिये प्राथमिक विद्यालयो मे प्रबन्धो को लेकर अंदरूनी तौर पर सर्वोच्च प्राथमिकता मे रखा गया है। स्कूल गेट के आगोश मे मासूम की मौत को लेकर सीएम का अंदरूनी अमला पल पल के हालात पर गुपचुप नजर जमाये हुए है। सरकारी स्कूल मे हुई दुर्घटना के चलते दलित परिवार के एक मासूम की मौत को लेकर जिस तरह से प्रतापगढ़ का जिला एवं स्थानीय प्रशासन गूंगा और बहरा बना हुआ है, इसको लेकर आमआवाम मे अंदर ही अंदर की नाराजगी बुधवार को चायपान की दुकानों तक आक्रोश पनपने का भेंट चढ़ी नजर आ रही है। गौरतलब है कि सीएम योगी ने गांव मे बदहाल प्राथमिक शिक्षा को पटरी पर लाने के लिये सबसे पहले स्कूलों के हालात सुधारने का फरमान सुनाया है। इसके तहत गांव गांव के प्राथमिक विद्यालयो की सूरत बदलने के लिए स्कूलो मे रंगरोंगन के साथ टाइल्स भी बिछा दिये गये है। यहीं नही सीएम योगी की बेसिक शिक्षा को गुणवत्ता के तहत पटरी पर लाने के लिए अंग्रेजी माध्यम के कुछ माडल स्कूलो को निजी क्षेत्र मे संचालित माडल स्कूलो की बराबरी को लेकर अंर्तइच्छा भी बलवती महसूस की जाने लगी है। हालाकि प्रतापगढ़ के बेसिक शिक्षा विभाग को अभी भी सीएम की विभाग से जुडी अपने मन की सुधारात्मक योजनाओ को लेकर कोेई फिक्र नजर नहीं आता। अंदरखाने की चर्चा मे अगर थोडा भी नजर डाली जाय तो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ किसी भी समय बेल्हा का दौरा बिना बताये कर सकते है और प्रतापगढ़ मे सरकारी स्कूल के गेट ढहने को लेकर डीएम और सीडीओ तथा बीएसए की गैरजिम्मेदाराना भूमिका किसी बडी कार्रवाई की जद मे आ सकती है। गौरतलब है कि एक सप्ताह होने को है, किंतु सरकारी स्कूल के गेट की अनियमितता की चपेट मे आये मासूम छात्र की मौत को लेकर बेल्हा के निरंकुश अफसर जांच पडताल को जाने क्यू ठंडे बस्ते मे डालने पर अमादा है। औपचारिकता के तौर पर बीते मंगलवार को खुद कार्रवाई की जद मे आने वाले बीईओ ने स्कूल पहुंचकर जांच पडताल का हाई प्रोफाइल कागजी ड्रामा पेश किया है। कौन बताये, किसे समझाये कि जांच को गई टीम की पूर्व सूचना के बावजूद स्कूल के निलंबित हेडमास्टर और गांव की प्रधान मौके पर नजर नही आ सके। हां घटना से हीलते कांपते ग्रामीण जरूर अफसरो को गेट के निर्माण घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर मासूम की मौत का दुख दर्द पत्थर की दीवार पर पटकते देखे गये। गांव मे आज भी चले जाइए तो, मासूम राज के परिजन रो रोकर बेहाल दिखते है, सरकारी खाद्यान्न के नाम पर भले ही स्कूल के शिक्षामित्र और मास्टर आधा दर्जन छात्रो की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे है, बावजूद इसके हर अभिवावक अपने मासूम को स्कूल की चहरदीवारी मे झलक रही अकाल मौत को दुस्वप्न के रूप मे ही सही देखते हुए भेजने को तैयार नहीं है। यहां के हालात तो यही नजर आते है, शिक्षे तुम्हारा नाश हो....., अंग्रेजियत को भी अब हिन्दुस्तानी तालीम पर शर्म जो आने लगी है।


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