सुनील उपाध्याय
बस्ती : स्वच्छग्रहियो के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, जिस कार्य के लिये स्वच्छाग्रही को इंसेंटिव देने को कहा गया था,आज तक एक पैसा नही मिला , उसी कार्य को सफाई कर्मी स्वच्छाग्रही बनकर कर रहे है उन्हें ₹-25,000 हजार रुपये मिल रहे है यह अन्याय नही तो क्या है,जिस कार्य को स्वच्छाग्रही को 5 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया था, उसी समय बार बार कहा गया था , की आप सभी को समाज सेवा करना पड़ेगा,और आपके द्वारा किया गया कार्य जो भी होगा उसके बदले आप को इंसेंटिव दिया जायेगा आज 9 माह बीत गया , एक पैसा किसी भी स्वच्छाग्रही को ग्राम पंचायत स्वामित्व के नाम पर नही दिया गया है, जो कि माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार की सबसे लोकप्रिय योजना है, उत्तर प्रदेश सरकार बार बार जिलाधिकारी महोदय को सूचना दिया है ,लेकिन अभी तक स्वच्छग्रहियो के बारे में एक बार भी नही सोचा गया की इस महगाई में ये लोग कब तक भूखे पेट माननीय प्रधानमंत्री जी के सपनो को कैसे सफल बना सकेंगे।


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