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प्रेमचन्द के उपन्यास, कहानियां आज भी प्रासंगिक :दयाराम चौधरी


सुनील उपाध्याय 
बस्ती। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द को उनकी जयन्ती पर राजकीय कन्या इण्टर कालेज सभागार में याद किया गया। प्रेम चन्द साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुये सदर विधायक दयाराम चौधरी ने कहा कि प्रेमचन्द के उपन्यास, कहानियां आज भी प्रासंगिक हैं। गबन से गोदान, निर्मला से रंग भूमि तक उन्होने देश, समाज के यर्थाथ को शव्द देने के साथ ही अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय का मुखर होकर विरोध किया। 
कहा कि जो देश समाज अपने साहित्यकारों को भुला देता है उसका भविष्य नहीं होता। प्रेमचन्द का बस्ती से निकट का रिश्ता है। उन यादांे को संजोये रखने की जरूरत है। 
विशिष्ट अतिथि डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि प्रेमचन्द की कहानियां ग्राम्य जीवन के संघर्षों का दस्तावेज है। गोबर, धनियां जैसे पात्र आज भी गांवों में सहजता से मिल जाते हैं। कार्यक्रम का संचालन करते हुये वरिष्ठ कवि डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि ईदगाह की कहानी आज भी भीतर तक झकझोर देती है। एक शिक्षक और साहित्यकार के रूप में प्रेमचन्द्र का साहित्यक योगदान युगों तक अमर रहेगा। अध्यक्षता करते हुये सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि उनके नाम पर संस्था चलाने का उद्देश्य ही यही है कि मुंशी जी हमारे मन मानस में रमे रहे। 
इसी कड़ी में संस्थान द्वारा सदर विधायक दयाराम चौधरी को राष्ट्रीय सेवा गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। जयन्ती अवसर पर डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’, डा. वी.के. वर्मा, पंकज कुमार सोनी, डा. अफजल हुसेन अफजल, काजी अनवार हुसेन पारसा, विनोद कुमार मिश्र, डा. पारसनाथ चौधरी, विनोद कुमार उपाध्याय, कुलदीप सिंह, घनश्याम सिंह, सत्या पाण्डेय, जगदम्बा प्रसाद भावुक, श्रीमती नीलम सिंह, सुरेन्द्रनाथ ओझा, यशोदानन्द पाण्डेय, सन्तोष कुमार श्रीवास्तव, आलोक मणि त्रिपाठी, वशिष्ट पाण्डेय, राधेश्याम शुक्ल को और निराला साहित्य एवं संस्कृति संस्थान की ओर से सत्येन्द्रनाथ मतवाला को साहित्य मनीषी सम्मान से सम्मानित किया गया।
जयन्ती अवसर पर डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ के संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन में आतिश सुल्तानपुरी, सागर गोरखपुरी, पं. चन्द्रबली मिश्र, ताजीर बस्तवी, हरीश दरवेश, रामचन्द्र राजा, भद्रसेन सिंह बंधु, कैलाश चन्द्र दूबे ‘चंचल’ छबिराज ‘राज’ रामाज्ञा मौर्य, कलीम वस्तवी, कमलापति पाण्डेय, डा. राममूर्ति, लालमणि प्रसाद, नवनीत पाण्डेय, फूलचन्द्र चौधरी,  आदि ने काव्य पाठ कर भाव विभोर कर दिया। मो. वसीम अंसारी, श्याम ्रप्रकाश शर्मा, विनय कुमार श्रीवास्तव, बटुक नाथ शुक्ल, पेशकार मिश्र, लालचंद चौधरी, जगदीश प्रसाद पाण्डेय, अजय श्रीवास्तव, हरिस्वरूप दूबे, डा. वाहिद अली सिद्दीकी, आशुतोष नारायण मिश्र, लल्लू चौधरी के साथ ही बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। 

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