अखिलेश्वर तिवारी
बलरामपुर ।। जनपद बलरामपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था विगत कई वर्षों से वे पटरी हो चुकी है जिसके कारण जिले वासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है । सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद भी इस जिले में डॉक्टरों की मनमानी जग जाहिर है । कभी संसाधनों की कमी तो कभी डॉक्टरों की कमी के कारण इस जिले की जनता को दूसरे जनपदों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर निर्भर होना पड़ रहा है । विगत वर्षों में जिले के अस्पतालों में संसाधनों की कमी व निर्धारित संख्या के सापेक्ष डॉक्टरों की तैनाती काफी कम होने के कारण लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं ।
प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं । अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था सही तरीके से संचालित होती रहे इसकी जिम्मेदारी सीएम योगी ने जनप्रतिनिधियों को भी सौंपी है । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्र के विधायकों को अस्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वह सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पूरा ध्यान दें । स्थलीय निरीक्षण करके योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा भी बराबर लेते रहे और इस कार्य में यदि लापरवाही बरती जा रही है तो संबंधित अधिकारी को हिदायत के साथ-साथ शासन को भी अवगत कराएं जिससे कि उचित कार्रवाई भी की जा सके । बलरामपुर का दुर्भाग्य कहा जाएगा कि इस जिले में जो भी आ रहे हैं वह या तो कार्य करना नहीं चाहते या फिर कागजों पर काम करके पैसा लेने का प्रयास करते हैं ।
कोई प्राइवेट क्लीनिक चलाता है तो कोई प्राइवेट नर्सिंग होम में सेवाएं देता रहा है । शायद इसी का नतीजा है कि जिले के लगभग सभी अस्पताल डॉक्टरों से खाली रहते हैं । मरीज व उनके तीमारदार परेशान घूमते हैं । गत कुछ दिनों में कई घटनाएं ऐसी हुई जिसने मानवता को शर्मसार किया ही चिकित्सा व्यवस्था पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया है । उन्हीं घटनाओं में से संयुक्त जिला चिकित्सालय के डॉक्टर नितिन चौधरी द्वारा एक गरीब महिला के साथ की गई अभद्रता भी शामिल है ।
इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गरीबों को उचित मूल्य पर दवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खोले गए जन औषधि केंद्र पर भी गरीबों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं । ओपीडी के समय चिकित्सालय परिसर में खोला गया जन औषधि केंद्र बराबर बंद रहता है । साथ ही संयुक्त जिला चिकित्सालय में दवाओं की खरीद में किए गए एक करोड़ 40 लाख के घोटाले का मामला भी तूल पकड़ रहा है । इन सभी समस्याओं की शिकायत सदर विधायक पलटू राम से तमाम लोगों द्वारा किया गया है । शिकायतों का संज्ञान लेते हुए विधायक ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक राजेश मोहन गुप्ता को कड़ी फटकार लगाई तथा समस्याओं को तुरंत सुधारने की हिदायत भी दी ।
उन्होंने यह भी कहा कि वह अस्पताल आकर के अभी सब को ठीक करते हैं । सदर विधायक पलटू राम ने बताया कि उन्होंने सीएमएस को जो हिदायतें दी थी उनको कुछ लोगों द्वारा धमकी की श्रेणी में लाकर प्रचारित करने का प्रयास किया जा रहा है । विधायक पलटू राम का कहना है कि यह हमारे खिलाफ दुष्प्रचार का एक जरिया है । बेअंदाज हो चुके चिकित्सा अधीक्षक की इतनी शिकायतें मिल चुकी थी की उन शिकायतों के बाद किसी का भी उत्तेजित होना स्वाभाविक है और मैंने भी उनको हिदायत कड़े शब्दों में कार्य में सुधार लाने की चेतावनी दी है जिसे कुछ लोगों द्वारा दुष्प्रचार के रूप में पेश किया जा रहा है । जो भी हो स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्त कार्रवाईयों की जरूरत है तथा निरंकुश हो चुके डॉक्टरों पर भी नकेल कसने की आवश्यकता है ।
हालांकि सदर विधायक ने स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को पत्र लिखकर चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेश मोहन गुप्ता के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है साथ ही पूरे मामले की जांच करा कर अन्य दोषियों के ऊपर भी कार्रवाई कराने की मांग उठाई है । आपको हम बता दें कि जिला संयुक्त चिकित्सालय में पिछले कुछ महीनों में बड़े पैमाने पर अनियमितता किए जाने की शिकायतें उभर कर सामने आई हैं जिनमें दवा खरीद में घोटाला, फर्नीचर खरीद में घोटाला तथा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में भी घोटाले की शिकायतें हुई हैं ।
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत ठेकेदारों द्वारा अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए का गोलमाल किया गया है । इस पूरे मामले की जांच के लिए विधायक ने शासन को पत्र लिखा है अब देखने वाली बात होगी शासन इस पर क्या रुख अख्तियार कर रहा है ।


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