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संसार में नारी का सबसे अधिक योगदान : श्री प्रेमभूषण महराज









दौदापुर में रामकथा के चौथे दिन पहुंचे श्रावस्ती से भाजपा सांसद दद्दन मिश्र
ए. आर. उस्मानी / अजीज हसन सिद्दीकी
 गोण्डा। माताएं ममता स्वरूप हैं। इस संसार में सबसे ज्यादा योगदान नारी का ही रहता है,  क्योंकि सबसे ज्यादा अपनों के लिए वही खपती हैं।उक्त विचार ग्राम दौदापुर में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा वाचक संत श्री प्रेमभूषण जी महराज ने उपस्थित लोगों से कही।
     श्री महाराज ने प्रभु राम की बाल लीलाओं को विस्तार से सुनाया। आनंद के प्राप्ति की अनुभूति सभी की अलग अलग होती है। श्री महराज ने कथा में कहा कि जब प्रभु का जन्म हुआ, उसके छठवें दिन प्रभु के नामकरण के लिए गुरु विश्वामित्र जी को बुलाया गया,  तो उन्होंने कहा कि इनके नाम तो अनंत हैं। कौन सा नाम दिया जाए ? भगवान जब तक किसी के हृदय में नहीं बसते, तब तक उनकी अनुभूति हो ही नहीं सकती। अवध में पूरे 1 माह तक प्रभु के जन्म पर प्रतिदिन आनंद का महोत्सव मनाया गया। जैसे भगवान असीम हैं, वैसे आनंद भी असीम है। उन्होंने भक्ति करने के लिए संबंध को जरूरी बताया। संबंध उसी का प्रगाढ़ होता है, जब उसके लिए खपा जाए,  तभी संबंध में पुष्टता आती है। श्री महाराज ने कहा कि रामावतार में सबसे अधिक माता सीता जी ने ही अपने आप को तपाया। उनसे अधिक प्रभु श्रीराम को भी नहीं तपना पड़ा। बिना योग्यता के कोई कुछ भी नहीं प्राप्त कर सकता। हम सभी जानते तो बहुत कुछ हैं,  लेकिन उन्हें मानते कहां हैं।

    कथा में महराज ने कहा कि राम कथा के उपासक विश्व के कई देशो में हैं। इसे सभी को मानना होगा,  तभी कल्याण होगा। कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान पदुमनाथ तिवारी, संतोषमणि तिवारी, अम्बरीष तिवारी ने महराज जी की आरती उतारी।

    कथा कार्यक्रम में सांसद दद्दन मिश्र, पूर्व विधायक नंदिता शुक्ला, भाजपा के जिलाध्यक्ष पीयूष मिश्र, हिन्दू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष शारदाकांत पांडेय, हरीश तिवारी, राजेश दूबे, सहजराम तिवारी, विजय प्रताप द्विवेदी, दिनेश शुक्ल सहित हजारों लोग उपस्थित रहे और रामकथा का आनंद लिए।
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