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भक्ति और प्रेम में नहीं होती क्रिया की प्रधानता : प्रेमभूषण जी महराज














दौदापुर में श्री रामकथा के पांचवें दिन पहुंचे डीएम, एसपी और सीडीओ
ए. आर. उस्मानी / अजीज हसन सिद्दीकी
इटियाथोक, गोण्डा। जो लोग ब्यस्त हैं और उन्हें अपने काम से समय नहीं मिल पाता, वे लोग ही सभी तरह के कार्य कर पा रहे हैं, जबकि जिनके पास काम ही नहीं है, वे कोई कार्य भी नहीं कर पाते।उक्त विचार दौदापुर ग्राम में चल रही श्री राम कथा के पांचवें दिन श्री प्रेमभूषण जी महाराज ने कही।




  गुरुवार को कथा में श्री महराज ने प्रभु राम के विवाह की कथा को बड़े ही सुंदर व मार्मिक ढंग से उपस्थित लोगों को सुनाया। संगीतमयी भजनों व सुंदर दोहो की प्रस्तुति से लोग ताली बजाकर खूब झूमे। रामावतार में भगवान ने 3 प्रकार की लीला की इसमे संसार लीला,श्रृंगार लीला,व संघार लीला,शामिल है।जब देवतावो के राजा इंद्र को गौतम ऋषि ने श्राप दिया और साथ ही अपनी पत्नी को भी पत्थर होने का श्राप दिया था जिससे भगवान इधर ही आए और अहिल्या का भगवान द्वारा उद्धार हो सके। कथा में कहा गया कि विराट कभी भी अपना परिचय नहीं देता लेकिन जो कुछ भी नही होता है वो बिना परिचय के रह ही नही सकता। भक्ति में क्रिया की प्रधानता नहीं होती और न ही प्रेम में जैसे केवट ने भगवान का पूजन नही किया था केवल पैर ही धोया था।






 श्री महाराज ने अपने कथा के दौरान कहा कि बच्चों में कथा सुनने की प्रवृत्ति बढ़ानी चाहिए कथा सुनने की उम्र भी पचास के पूर्व को ही सही बताया। बचपन का संस्कार ही 55 को सिद्ध करता है। बचपन प्रयोग के लिए है जबकि 55 केवल भजन के लिए ही उपयुक्त बताया। त्याग जीवन में कभी करना नहीं होता है वह खुद ही हो जाता है। जैसे जैसे हम परमात्मा की तरफ बढ़ेंगे वैसे ही त्याग अपने आप होने लगता है, क्योंकि साइफन विधि से संस्कार कभी नही बढ़ता। श्री राम जी के विवाह के लिए आयोजित धनुष यज्ञ की कथा को श्री महराज ने बड़े अच्छे ढंग से कथा में सुनाया।





कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान पदुमनाथ तिवारी, संतोषमणि तिवारी, अम्बरीष तिवारी सहित मुख्य लोगों ने श्री महाराज की आरतीं उतारी। हनुमान चालीसा का सुंदर पाठ कथा में हुआ जिससे सभी लोग प्रसन्न हुए। 








कथा के दौरान डीएम कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक लल्लन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी अशोक कुमार, के के श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश शुक्ला, राकेश चौबे, पहलवान दिग्विजय तिवारी, विकास मिश्र, प्रभाकर शुक्ल, राजेश तिवारी, ब्यास मुनि सिंह, सी पी एन सिंह, श्रीमती कल्प देवी, रुचि तिवारी, प्रियंका तिवारी, नीती पांडेय सहित हजारों कथा प्रेमी कथा पांडाल में उपस्थित रहे।
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