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आन्दोलित वनकर्मियों ने दिया आमरण अनशन की चेतावनी








सुनील उपाध्याय 
बस्ती । 5 सूत्रीय मांगो को लेकर दैनिक वेतन वन कर्मचारी संघ का धरना जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में दसवे दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि मण्डल ने सोमवार को उप श्रमायुक्त से वार्ता कर निस्तारण का आग्रह किया किन्तु दूसरा पक्ष उपस्थित भी नहीं हुआ।  कर्मचारियों ने चेतावनी दिया कि यदि बकाया वेतन भुगतान, विनयमितीकरण, बोनस, हेक्टेयर प्रथा समाप्त कर 30 दिन काम के बदले पूरे माह के भुगतान, 10 वर्ष पुराने दैनिक वन कर्मियों को न्यूनतम वेतन दिये जाने की मांगे पूरी न हुई तो वे धरने को आमरण अनशन में बदलने को बाध्य होंगे। 






धरने को सम्बोधित करते हुये संघ के मण्डलीय मंत्री भीम सिंह ने कहा कि लगातार 10 दिनों से धरना जारी है किन्तु डीएफओ चुप्पी साधे हुये हैं। यदि कर्मचारियों से वार्ता कर समस्या का निस्तारण किया गया होता तो वे धरना देने को बाध्य न होते। संघ अध्यक्ष रामनेवास ने कहा कि पूर्व में किये गये लिखित समझौते का भी पालन अधिकारी नहीं कर रहें हैं और दैनिक वेतनभोगी बेहाल है। उनकी न्यायोचित मांगो को भी अनसुनी किया जा रहा है। 








जिलाधिकारी कार्यालय पर चल रहे धरने को समर्थन देते हुये उ.प्र. राज्य कर्मचारी महासंघ अध्यक्ष कौशल किशोर उपाध्याय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेन्द्र चौहान ने कहा कि मांगे न मानी गई तो महासंघ भी आन्दोलन में सहयोग करने को बाध्य होगा। उ.प्र. चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ जिलाध्यक्ष राम सूरत यादव ने कहा कि दैनिक वेतन वन कर्मचारियों की घोर उपेक्षा हो रही है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।







धरने में दैनिक वेतन वन कर्मचारी संघ मंत्री हरीराम निषाद, धर्मराज, समयदीन यादव, गौतम कुमार यादव, शत्रुघ्न यादव, प्रदीप लाल, रामनेवास, ओम प्रकाश, दुर्गा प्रसाद, राम गोपाल वर्मा, लक्ष्मी नरायन, जगराम, राम गुलाम, रामतीर्थ, अजय पाण्डेय, इकबाल हुसेन, फूलचंद तिवारी के साथ ही अनेक कर्मचारी शामिल रहे।

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