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अयोध्या कोतवाल व दरोगा को गिरफ्तार कर कोर्ट में करें पेश









अमरजीत सिंह 
अयोध्या ब्यूरो ।अधिवक्ता मो. अहसान की मोटर साइकिल को जबरन रोक कर अमर्यादित व्यवहार करने एवं विरोध करने पर अधिवक्ता के परिचय पत्र को फेंक कर अपमानित कर जेल भेजने की धमकी देने के मामले में गैर जमानती वारंट के बाद भी न्यायालय में हाजिर न होने पर अध्योध्या कोतवाल जगदीश उपाध्याय व पूराकलन्दर में तैनात दरोगा राकेश कुमार पर कानूनी शिकंजा कसने लगा है।







द्वितीय अपर सिविल जज (जूडि) देवेन्द्र प्रताप सिंह ने सुनवाई के समय प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आरोपी अयोध्या कोतवाल व दरोगा के विरूद्ध पुन: गैर जमानती वारंट जारी करते हुए फैजाबाद के एसएसपी को आदेशित किया है कि वारंट को तामील कराकर 29 नवम्बर तक दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करें।अन्यथा आरोपियों की सम्पत्ति की जब्ती की कार्यवाही की जाएगी।आदेश की प्रति आईजी व डीजीपी उत्तर प्रदेश को सूचना के लिये प्रेषित किये जाने का भी निर्देश दिया।






यह प्रकरण तारुन थाना क्षेत्र का वर्ष 2017 का है। न्यायालय में दाखिल परिवाद के मुताबिक 15 मई 2017 की शाम आठ बजे कचहरी मुख्यालय पर वकालत कर रहे अधिवक्ता मो. अहसान अपने बड़े भाई इमरान अहमद के साथ  रामपुरभगन बाजार में घरेलू सामान खरीदने गए थे। तभी वहां मौजूद दरोगा राकेश कुमार ने अधिवक्ता की मोटर साइकिल को जबरन रोक लिया। बाइक स्पीड में होने की वजह से थोड़ा आगे जाकर रूक गई। इसके बाद नाराज दरोगा ने अपशब्द कहते हुए अधिवक्ता को अपमानित किया।






 इसका विरोध करते हुए मो. अहसान ने कहा कि वह अधिवक्ता हैं। परिचय पत्र दिखाया। इससे भड़के दरोगा ने अधिवक्ता से अमर्यादित व्यवहार किया। इस दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष तारुन जगदीश उपाध्याय ने अधिवक्ता के परिचय पत्र को फेंक दिया और धक्का देकर गिरा दिया। इसके बाद अधिवक्ता की मोटर साइकिल लेकर थाना तारुन चले गए।








 मामले में दायर परिवार में न्यायालय ने अयोध्या कोतवाली जगदीश उपाध्याय व पूराकलन्दर में तैनात दरोगा राकेश कुमार को आठ सितम्बर 2017 को धारा 341, 504 व 379 के तहत तलब कर लिया था। इसके बाद दोनों के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया गया।

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