अधिकारियों को गलत और तथ्यहीन रिपोर्ट भेजकर गुमराह करती है पुलिस
ए.आर.उस्मानी
गोण्डा। मोतीगंज थाना क्षेत्र में कच्ची जहरीली शराब का अवैध कारोबार इलाकाई पुलिस और आबकारी विभाग की साठगांठ से गोरखधंधे का रूप ले चुका है। इस इलाके में आने वाले दर्जनों गांवों में खुलेआम जहरीली शराब की भट्ठियां धधकती हैं।
बताते हैं कि इसके एवज में हल्का दरोगा और सिपाही शराब कारोबारियों से प्रतिमाह एक निश्चित रकम वसूलते हैं। महज कुछ रूपयों के लालच में ये खाकी वर्दीधारी गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि 800 से 1500 रूपये तक की वसूली अवैध शराब कारोबारियों से हर महीने की जाती है। कुछ बड़े धंधेबाज 2 से 5 हजार तक प्रतिमाह पुलिस को चढ़ावा चढ़ाते हैं। शिकायतें होने तथा मीडिया में खबरें आने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है।
इतना ही नहीं, पुलिसकर्मियों द्वारा अधिकारियों को गुमराह करते हुए इस बाबत गलत रिपोर्ट और जानकारी भी दी जाती है। इससे जहरीली शराब के धंधेबाजों के साथ ही इलाकाई पुलिस भी बेलगाम हो चुकी है।
जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र के हल्का नंबर तीन के सीहागांव, गौरवा कानूनगो, बढ़ई पुरवा सहित दर्जनभर गांव अवैध कच्ची जहरीली शराब के लिए कुख्यात हैं। यहां जैसे जैसे दिन ढलता है, वैसे वैसे शराब की 'मण्डी' गुलजार होने लगती है। शाम होते ही सड़क किनारे और गन्ने के खेतों में शराबियों का मेला लग जाता है।
इसके अलावा विद्यानगर, रामपुर आदि गांवों में भी हल्का पुलिस के संरक्षण में जहरीली शराब का धंधा परवान चढ़ा हुआ है। हल्का नंबर एक में भी दर्जनभर से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां खुलेआम गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जाता है। कच्ची शराब पीकर आए दिन लोग असमय ही जान गंवा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद खाकी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। बताया जाता है कि मोतीगंज थाने के दरोगा और सिपाही शराब कारोबारियों को खुली छूट दे रखे हैं।
इसके बदले में ये प्रति शराब विक्रेता से हर महीने 800 से 1500 रूपये तक वसूलते हैं, जबकि बड़े और अन्तर्जनपदीय कारोबारियों से 2 से लेकर 5 हजार रूपये तक की वसूली की जाती है। इन गांवों में जब भी छापा मारने का प्लान बनता है, तो इनके द्वारा इसकी सूचना शराब के धंधेबाजों को पहले ही दे दी जाती है, जिससे वे सावधान हो जाते हैं।
क्षेत्र के बढ़ई पुरवा में पिछले दिनों कच्ची शराब पीने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। मीडिया में खबरें आने के बाद इलाकाई पुलिस ने ग्राम प्रधान से यह लिखाकर अधिकारियों को गुमराह करते हुए रिपोर्ट भेज दी कि उसकी मौत शराब पीने से नहीं, बल्कि पेट दर्द से हुई थी। हालांकि परिजन शराब से ही मौत होने की बात कह रहे थे लेकिन आरोप है कि उन्हें पुलिस और प्रधान द्वारा धमकाया गया।
मोतीगंज थाना क्षेत्र का ललकी पुरवा और रामनगर बाजार भी अवैध कच्ची शराब के लिए विख्यात है। यहां बड़े कारोबारियों का नेटवर्क पड़ोसी नेपाल राष्ट्र तक फैला हुआ है। इसके अलावा बलरामपुर, बस्ती, फैजाबाद, अम्बेडकर नगर और महराजगंज जैसे जिलों से भी शराब माफियाओं के तार जुड़े हुए हैं। इन जनपदों में बाइक या लग्जरी गाड़ियों से कच्ची शराब की सप्लाई की जाती है।
यहां भी हल्का दरोगा और सिपाही शराब के धंधेबाजों से मोटी रकम वसूल कर मालामाल हो रहे हैं और शराब के आदी गरीब तबके के मजदूरी पेशा लोग कंगाल होने के साथ ही असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अमूमन महुआ, गुड़ आदि से बनायी जाने वाली कच्ची शराब का ट्रेंड अब बदल चुका है। शराब को 'चोखा' (अधिक नशीला) करने के लिए उसमें अब नशादर और यूरिया खाद के साथ ही नशीली दवाओं आदि का भी मिश्रण किया जाता है। इससे शराब तो काफी तेज़ हो जाती है, लेकिन पीने वालों के जीवन की रफ्तार धीमी कर देती है और इसके नियमित सेवन से वे समय से पहले ही मौत के मुंह में समा जाते हैं।




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