रिपोर्ट:सैय्यद सनाउद्दीन इसौली सुल्तानपुर
इसौली,सुल्तानपुर साधन सहकारी समीतियों में डीएपी नही मिलने से किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार के लाख दावों के बावजूद किसान के हित में सरकारी अमला नकाम साबित होता हुआ दिखाई दे रहा है लंम्बी लंम्बी डींगे हाकने में कोई कसर नहीं छोड़ते जिले के आला अधिकारी।गेहूं की बुआई इस समय पुरे उरूज पर है लेकिन बल्दीराय क्षेत्र के किसी सोसायटी पर डीएपी खाद की आपूर्ति नही होने के कारण यहा इलाकाई किसान दर दर भटकने पर मजबूर हैं।इसी के कारण बुआई लेट हो रही है कुछ किसान बतौर मजबूरी बाहर की दुकानों से जैसे तैसें खाद ले रहे है साथ ही साथ उसे नकली खाद होने का डर सता रहा है।
क्योंकि पिछले दिनों नकली खाद की बिक्री जोरदार तरीके से चालू है के बी के बरासिन के प्रभारी डा. रवि प्रकाश मौर्या ने बताया कि गेहूं की बुआई लेट करने पर प्रतिदिन के हिसाब से उत्पादन मे कमी आती है।कुछ किसान इस समस्या से भी झुजते नजर आये कि इनकी पिछली फसल धान क्रय केन्द्र पूरे क्षेत्र में नहीं चला जिससे किसान अपनी उत्पादित फसल को बिक्रय करके अगली फसल मे निवेश करता।जिससे किसान अपनी फसल का सही मूल्य नही पा रहा है और किसान घाटे पर बेचने पर मजबूर हैं।किसान की इन दोनों समस्या की अनदेखी करने वाले आला अधिकारियों प्रति किसानो मे नराजगी ब्याप्त है। कहने को तो भारत एक कृषि प्रधान देश है "भित्तर की मार दहजर्वे जानैं वाली कहावतों शुभ संकेत मिलता है" जहाँ तक बात की जाये भारत की मईशत का चालीस फीसदी हिस्सा खेती पर निर्भर है।और ज्यादा तर लोग किसानी कर के अपना जीवन यापन करतें है फिर भी सरकार का रवैया तो देखने लायक है। कहा जाता है कि शहरों का रास्ता गावों से चलकर आता है लेकिन सबसे ऊंचे दर्जे पर बैठे आला हाकिमों को कोई फ़िक्र ही नही है।

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