ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। जिले का प्रतिष्ठित महाविद्याय एक बार फिर जिला प्रशासन के हठधर्मिता के कारण चर्चा का विषय बन गया है। बिना प्रबन्ध समिति के अनुमोदन के आधे दर्जन असिस्टेन्ट प्रोफेसरों की महाविद्यालय में ज्वाइनिंग और एक प्रोफेसर को अवैध रूप से तीन माह की छुट्टी और स्थानान्तरण के लिए एनओसी भी जारी कर दिया गया।
बताते चले महाविद्याल में बिना प्रबन्ध समिति को विश्वास में लिए और बिना अनुमोदन के अधे दर्जन असिस्टेन्ट प्रोफेसरों को ज्वाइन पिछले वर्ष करा दिया गया। इन प्रोफेसरों का अनुमोदन प्रबन्ध समिति से नही करायी गयी। यही नही लोहांस कल्याणी का एक वर्ष परिविक्षकाल पूरा होने पर पिछली प्रबन्ध समिति में शिक्षकों की मांग पर परिविक्षा काल पूरा होने का पास करा लिया गया।
पिछले वर्ष पवन सिंह, जय शंकर तिवारी, नीरज यादव,लोहांश कल्याणी, चमन कौर को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर ज्वाइन करा दिया गया जिसका अनुमोदन अगली बैठक में कराना चाहिए लेकिन ऐसा नही किया गया। एक असिस्टेन्ट प्रोफेसर किसी आप कर अधिकारी के घराने की है। बिना किसी जांच पड़ताल, सक्षात्कार के सोनल अग्रवाल को महाविद्यालय में ज्वाइन करा दिया गया। इनका भी प्रबन्ध समिति की बैठक में अनुमोदन नही लिया गया। मनोविद्यालय की प्रोफेसर सोनल अग्रवाल ने क्लास लेना भी शुरू कर दिया |
लेकिन नेत्र दोष होने के कारण छात्रों ने विरोध करना शुरू किया कि ये लेक्चर नही दे पा रही है। सोनल को नियम विरुद्ध जाकर ज्वाइनिंग के एक माह बाद ही तीन माह का अवकाश दे दिया गया और अब उसे प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष द्वारा नियमों के विरुद्ध स्थानान्तरण की एनओसी भी जारी कर दी गयी। एनओसी का प्रकरण भी प्रबन्ध समिति में नही रखा गया है। इधर पुनः सोनल ने रजिस्टर्ड डाक से तीन माह के छुट्टी के लिए आवेदन किया है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिवम पाण्डेय और वैभव सिंह ने आरोप लगाया कि नियम विरुद्ध शिक्षिका को महाविद्यालय में ज्वाइन करा दिया गया। शिक्षिका सोनल आँख से देख नही पाती और सुन भी नही पाती। इसके बावजूद जनरल कटेग्री में ज्वाइन कराया गया है। शिक्षिका अपने को दिव्यांग भी नही मानती। यदि दिव्यांग कोटे से होती तो प्रेटिकल नही करा सकती। जब इसका हम लोगों ने विरोध किया तो शिक्षिका छुट्टी लेकर चली गयी है।
क्या है असिस्टेन्ट प्रोफेसर के सम्बन्ध में नियम
- महाविद्यालय में असिस्टेन्ट प्रोफेसर के ज्वाइनिंग से पूर्व उनकी जांच पड़ताल होनी चाहिए और ज्वाइन अनुमोदन के प्रत्यासा में कराना चाहिए।
- ज्वाइन कराने के बाद कभी भी प्राचार्य मात्र 15 दिन का अवैतनिक दे सकता है। इससे अधिक दिन के अवकाश के लिए अवैतनिक अवकाश क लिए प्रबन्ध समिति में प्रस्ताव पास होना चाहिए और शिक्षण कार्य के पांच वर्ष के बाद ही स्थानान्तरण के लिए एनओसी के लिए प्रबन्ध समिति में रखने के बाद दिया जा सकता है।
प्रबन्ध समिति को दर किनार कर छुट्टी व एनओसी दिया गया
- अभी तक आधे दर्जन असिस्टेंट प्रोफेसरों के ज्वाइनिंग को ही प्रबन्ध समिति में अनुमोदन के लिए नही रखा गया और अब नया मामला सोनल अग्रवाल का आ गया है। जिसे नियम विरुद्ध परिविक्षा काल में ही बिना प्रबन्ध समिति के अनुमोदन के छुट्टी देना और फिर एनओसी देना चर्चा का विषय बन गया है।
प्राचार्य हरि प्रकाश श्रीवास्तव का कथन
- लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के प्राचार्य हरि प्रकाश श्रीवास्तव से जब बात की गयी तो उन्होंने बताया कि असिस्टेंट प्रोफेसर के ज्वाइनिंग का अनुमोदन प्रबन्ध समिति में होना चाहिए लेकिन ही कराया गया। प्राचार्य ने
- सोनल अग्रवाल के सम्बन्ध में बताया कि परिविक्षा काल में बिना प्रबन्ध समिति में प्रस्ताव पास हुए छुट्टी नही दी जा सकती और न ही एनओसी दी जा सकती है। उन्होंने यह भी पुष्टि की है कि तीन माह के छुट्टी के बाद पुनः रजिस्टर डाक से छुट्टी का आवेदन आ गया है। उन्होंने बताया अध्यक्ष महोदय द्वारा एनओसी जारी किया गया है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 15 को निकालेगा पदयात्रा, देगा ज्ञापन
- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिवम पाण्डेय और वैभव सिंह ने बताया कि 15 दिसम्बर को शास्त्री महाविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, छात्र संघ चुनाव, कैन्टीन, शिक्षिका सोनल अग्रवाल को लेकर महाविद्यालय से पैदल यात्रा निकाल कर जिलाधिकारी को ज्ञापन देगा।


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