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एसपी साहब ! न्याय मुहैया कराने के लिए मोतीगंज पुलिस मांग रही 20 हजार











घर व जमीन में हिस्से के लिए दर दर भटक रही विधवा
 तारीख पर तारीख दे रही पुलिस, समाधान हुआ टेढ़ी खीर
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिले के पुलिस कप्तान राकेश प्रकाश सिंह पीड़ितों को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय मुहैया कराने के लाख दावे और कोशिशें कर लें, लेकिन कड़वा सच यह है कि बिगड़ैल सिस्टम और पुलिस की तानाशाही के चलते पीड़ित न्याय की खातिर दर दर भटक रहे हैं।






 हद तो यह है कि उप जिला मजिस्ट्रेट जैसे अधिकारी के आदेश को भी बेलगाम पुलिसकर्मी ठेंगा दिखाने में गुरेज नहीं करते हैं। ताज़ा मामला जिले के मोतीगंज थाने का है, जहां एक बुजुर्ग विधवा महिला के लिए न्याय शब्द ही बेमानी है! इलाकाई पुलिस समस्या का समाधान करने के बजाय बुजुर्ग महिला को सिर्फ तारीख पर तारीख देती आ रही है।




        जिले का मोतीगंज थाना अपनी कार्यशैली के चलते चर्चा में बना रहता है। यहां बलात्कार और जानलेवा हमले जैसी संगीन वारदातों की एफआईआर भी बहुत दबाव के बाद दर्ज की जाती है। ज्यादातर आपराधिक मामलों को दबा दिया जाता है। तमाम मामलों में पुलिस पीड़ित को इतनी बार थाने की परिक्रमा कराती है कि वह थकहार कर मजबूरन अपने घर बैठ जाता है या न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है। ऐसा ही एक मामला मोतीगंज थाना क्षेत्र के विद्यानगर गांव का है। उक्त गांव की निवासिनी बुजुर्ग विमला देवी पत्नी स्वर्गीय मंशाराम तिवारी पिछले कई माह से थाने की परिक्रमा कर रही हैं, लेकिन उन्हें न्याय मुहैया कराने के बजाय पुलिस द्वारा उनका आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। विधवा विमला देवी थाने पर समस्या का समाधान न होने पर एसडीएम मनकापुर के समक्ष पेश हुईं और उनसे न्याय की फरियाद की। पूरा प्रकरण सुनने तथा कागजातों को देखने के बाद एसडीएम ने मोतीगंज थानाध्यक्ष तत्काल कार्रवाई करते हुए बुजुर्ग महिला को पुत्रों से उनका हिस्सा दिलाने का आदेश दिया।





    अपने ही पुत्रों के उत्पीड़न से त्रस्त बुजुर्ग महिला  विमला देवी ने अधिकारियों से की गई शिकायत में कहा है कि उनके पति मंशाराम तिवारी की 11 अक्टूबर 2012 में मृत्यु हो गई थी। उनके दो लड़के क्रमशः सुरेश व राजेश हैं। उनका कहना है कि पति की मृत्यु के बाद से वह बेघर हैं। उनके दोनों पुत्रों ने घर और खेतों पर कब्जा कर रखा है। हिस्सा मांगने पर मार पीट पर आमादा हो जाते हैं। उन्हें पुत्रों द्वारा न तो घर में रहने दिया जाता है और न ही जमीन में हिस्सा दे रहे हैं। इसकी शिकायत दर्जनों बार उच्च अधिकारियों से की गई लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं किया गया।



  
थानाध्यक्ष मोतीगंज, गोरखनाथ सरोज
इस सम्बंध में मोतीगंज थानाध्यक्ष गोरखनाथ सरोज का कहना है कि दोनों पक्षों को थाने पर बुलाकर सुलह समझौता कराया गया था, लेकिन घर जाकर एक पक्ष सुलहनामे से मुकर गया। अब इसमें पुलिस क्या कर सकती है? हालांकि उन्होंने कहा कि दिखवाते हैं की क्या किया जा सकता है।





बिकता है न्याय, पुलिस मांग रही 20 हजार !

बुजुर्ग विधवा विमला देवी का आरोप है कि मोतीगंज थाने की पुलिस उनसे जमीन तथा घर में हिस्सा दिलाने के लिए 20 हजार रूपये मांग रही है। इसकी शिकायत मंगलवार को समाधान दिवस में एसडीएम से भी की गई। पीड़िता के अनुसार एसडीएम मनकापुर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को जमीन और मकान में हिस्सा दिलाने का आदेश दिया लेकिन इसके बाबजूद बेलगाम मोतीगंज पुलिस की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। मोतीगंज थाने के बिगड़े निजाम का खामियाजा वृद्ध विधवा महिला को भुगतना पड़ रहा है।



वर्ष 2015 में छोटे पुत्र को बेदखल कर चुकी है मां

विधवा विमला देवी ने बताया कि छोटे बेटे राजेश द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न तथा उसके गलत चाल चलन के कारण वर्ष 2015 में ही उसे अपनी समस्त चल और अचल संपत्ति से बेदखल कर दिया था। इसके बाद भी वह स्थानीय पुलिस की साठगांठ से जमीन और मकान पर जबरन कब्जा किए हुए है। उनका आरोप है कि पुलिस उनके छोटे बेटे से मिलकर उनका तथा उनके बड़े पुत्र सुरेश का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण करने पर आमादा है। उन्होंने बताया कि तहसील समाधान दिवस में की गई शिकायत से बौखलाई पुलिस निस्तारण करने के बजाय 107व 116 की कार्रवाई कर रही है।
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