गोंडा- सुप्रसिद्ध साहित्यकार सतीश आर्य को उज्जैन में विक्रमशिला पीठ भागलपुर बिहार द्वारा विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। जिस के मुख्य अतिथि भारत के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अग्रज डॉक्टर राम स्वरूप भारती रहे।
सतीश आर्य अवधी, ब्रज व खड़ी बोली के हस्ताक्षर कवि हैं। उनकी चार कृतियां“महुआ बृच्छ तले,दोऊ आखिन की पुतरी भई हिन्दी, छंद की छांव एवं महुआरी प्रकाशित हो चुकी है। उनके साहित्य पर ग्वालियर विश्वविद्यालय से डॉक्टर सुभाष श्रीवास्तव, एवं कानपुर विश्वविद्यालय से डॉ निधि कश्यप आदि ने पीएचडी की उपाधि पाई है।
महुआ चुवै सारी रात पुस्तक अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ाई जा चुकी है। दोउ आंख की पुतली पुस्तक उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से पुरस्कृत हो चुकी है। उनकी रचनाएं देश के प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं।
सतीश आर्य को मानस संगम कानपुर, मनीषा प्रकाशन जबलपुर, निदेशक ज्ञानपीठ साहित्य अकादमी दिल्ली, कानपुर के साहित्य संस्था अभिव्यंजना भाषा संस्थान उत्तर प्रदेश साहित्य संस्थान अयोध्या साहित्य कला केंद्र फिरोजाबाद द्वारा कई बार सम्मानित किया जा चुका है। सतीश आर्य को विद्या बागीश मानद उपाधि से भारती परिषद से शाखामृत सम्मान गोरखपुर विश्वविद्यालय से अमृत कलश, ललित गीत सृजन सम्मान गोंडा से हर्षाकेश चतुर्वेदी ब्रज भाषा सम्मान हिंदी संस्थान साहित्य शिरोमणि बस्ती से साहित्य गौरव साहित्य संस्थान दिल्ली कबीर सम्मान लखनऊ काव्यभूषण सम्मान बस्ती एवं बल्लारी कर्नाटक से तथा शिखर सम्मान झारखंड से मिल चुका है।


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