सुनील उपाध्याय
बस्ती। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को उनकी जयंती पर याद किया गया। जिलाध्यक्ष राधेश्याम चौधरी के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने चौधरी रिण सिंह हॉस्टल पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके योगदान पर चर्चा की। राष्ट्रीय लोकदल युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव राजा ऐश्वर्यराज सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि चौधरी चरण सिंह को यूँ ही किसानों का मसीहा नही कहा जाता। उन्होने अपने सार्वजनिक जीवन में किसानों की खुशहाली को प्राथमिकता दी और कई महत्वपूर्ण कदम उठाये।
महात्मा गांधी के वर्ष 1942 में ’करो या मरो’ के आह्वान पर चौधरी साहब ने बागपत समेत पश्चिम यूपी में क्रांतिकारियों का ऐसा गुप्त संगठन खड़ा किया कि मेरठ के तत्कालीन प्रशासन ने उन्हें देखते ही गोली मारने का आदेश दे दिया था। बागपत से सियासत शुरू कर साल 1937 में गाजियाबाद से प्रांतीय धारा सभा में चुनकर पहुंचे। उन्होंने 17 मई 1939 को ऋण निवृत्ति बिल सभा में पारित करा लाखों किसानों को ऋण मुक्त कराया। जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू कर किसानों को जमीन का मालिक बनाने, किसानों को पटवारी राज से मुक्ति दिलाने, किसानों के बिखरे खेतों को एक चक बनवाने के लिए चकबंदी अधिनियम पारित कराया।
उन्होने नहर की पटरियों पर चलने पर जुर्माना लगाने का ब्रिटिश काल का कानून खत्म कराकर किसानों को बड़ी राहत दी। शहरों में कानून व्यवस्था मजबूत बनाने को 1961 में वायरलेस युक्त पुलिस सचल दस्तों की गश्त शुरू कराने का काम किया। उन्होने गरीब बेरोजगारों को काम के बदले अनाज तथा वंचित वर्ग के लिए अंत्योदय योजना शुरु कराने का काम किया। चौधरी चरण सिंह द्वारा किये गये ऐसे अनेक योगदान हैं जिन्हे कभी भुलाया नही जा सकता।
जिलाध्यक्ष राधेश्याम चौधरी, ओम प्रकाश चौधरी, राय अंकुराम श्रीवास्तव आदि ने भी चौधरी चरण सिंह के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। मनीष सिंह, डॉ फारूक उबैदुल्लाह, उदयभान चौधरी, शिव कुमार गौतम, इंद्र बहादुर यादव, शेर सिंह, वकास अहमद, अजय सिंह, मनीष सिंह राणा, अतुल सिंह, फजलुर रहमान, उवीक तैयब, बब्बू खान, पप्पू यादव, कमल सोनकर, बजरंगी निषाद, राकेश्वर चौधरी, साईदुर रहमान, श्री राम मौर्य, रवि तिवारी, अर्जुन चौधरी, चुन्नू राय, ब्रिज किशोर त्रिपाठी, शिवम सिंह, प्रदीप सिंह, सुजीत शुक्ला, भरत प्रजापति, राम नाथ चौधरी, जय प्रकाश पाल, साइमन फारूकी, राजकुमार सोनकर, रमेश राय, अविनिष सिंह, नफीश अहमद, जग्गनाथ सोनकर, फैज़ान अहमद आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।


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