वासुदेव यादव
अयाेध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण काे लेकर 12 दिनों तक आमरण-अनशन और लगभग 20 दिनों तक जेल में रहने वाले तपस्वी छावनी के उत्तराधिकारी महन्त परमहंसदास ने अपने आन्दाेलन के क्रम में शुक्रवार काे बैलगाड़ी से तीर्थराज प्रयाग के लिए रवाना हुए। जहां वह भव्य राममन्दिर निर्माण के लिए 14 जनवरी से 20 फरवरी तक सिर्फ गंगाजल पीकर कुम्भ में तपस्या करेंगे। शुक्रवार काे विधि-विधान से नन्दी बैल का पूजन और साधु-संताें का आशीर्वाद लेकर परमहंसदास प्रयागराज के लिए यात्रा पर निकले।
तीर्थराज प्रयाग जाने से पूर्व उन्होंने अपने आश्रम पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहाकि मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु श्रीराम के भव्य मन्दिर निर्माण के लिए मैं कुम्भ में तपस्या करने बैलगाड़ी से जा रहा हूं। क्याेंकि ऋषि-मुनियाें ने कहा है कि जब सारे मार्ग बंद हाे जाए। ताे परमात्मा का मार्ग खुला हाेता है। हमारे प्राचीन परम्परा में सबसे पहले बैलगाड़ी ही है। बैल काे धर्म का स्वरूप माना गया है। भगवान शिव धर्म पर ही सवारी करते हैं और जब समुद्र मंथन हुआ था। ताे जहर का पान भगवान शिव ने किया। परमहंस ने कहाकि हमने साेचा सरकार की दमनकारी नीति जहर है, जिसका मैं पान कर रहा हूं। जब तक राममन्दिर नही बनेगा। तब तक मेरी तपस्या जारी रहेगी। आज मैं अयाेध्या से तीर्थराज प्रयाग के लिए रवाना हाे रहा हूं।
जहां पहुंचकर गंगाजल पान करके तपस्या पर बैठूंगा। तपस्या भी एक आमरण-अनशन है। उन्होंने कहाकि जब तक मेरी शरीर में जान रहेगी। ताे गंगाजल पीकर भगवान की आराधना करते रहेंगे। आज हमारा देश सात्विकता अर्थात सादा जीवन उच्च विचार का संदेश देता चला आ रहा है। वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर लाेग प्रदर्शन में धन का अपव्यय कर रहे हैं। इससे देश की गरीबी बढ़ती जा रही है। अगर प्रदर्शन में धन का अपव्यय छाेड़ दिया जाए। ताे एक साल में देश की गरीबी दूर हाे जायेगी। जितनी गौ आज घूम रही है। उनके लिए सभी जगह, गांव-गांव में गाैशाला का निर्माण हाे जायेगा। सिर्फ केवल प्रदर्शन में धन का अपव्यय बंद हाे जाए। बैलगाड़ी से आज ऐसी स्थिति पैदा हाे गई है। सादा जीवन व्यतीत करने वालाें का परिहास उड़ाया जा रहा है। महन्त ने कहाकि सादा जीवन उच्च विचार हमारी संस्कृति है।
इसलिए मैं बैलगाड़ी से प्रयागराज की यात्रा कर रहा हूं। प्रदर्शन की काेई आवश्यकता नही है। हमारी भारतीय संस्कृति सर्वाेपरि है। अपनी संस्कृति का त्याग न करें। उन्नति के शिखर पर ले जाने के लिए सादा जीवन हमारा सर्वश्रेष्ठ रहा है। धर्म के स्वरूप नंदी बैल से हमारी यात्रा है। इसके लिए संताें का आशीर्वाद मुझे मिला है। एक तीर्थराज प्रयाग वहां है। दूसरे साधु-संत भी चलते-फिरते तीर्थराज प्रयाग हैं यह गाेस्वामी तुलसीदास ने बतलाया है। आज जाे संताें का आशीर्वाद मेरे साथ है। निश्चित रूप से यह तपस्या सफल हाेगी।
परमहंसदास ने कहाकि मैंने पीएम मोदी काे पत्र लिखा है कि आप राममन्दिर बनवा नही सके। यहां तक रामभक्ताें काे आपने धाेखा देने का काम किया है। लेकिन यदि प्रयागराज में तपस्या करते हुए मेरे शरीर से प्राण निकल जाए। ताे आप मेरे शव काे तब तक रखना। जब तक राममन्दिर का निर्माण न हाे जाए। जिस दिन श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मन्दिर का निर्माण हाे जायेगा। उस दिन आप मेरे शव का अन्तिम संस्कार कर दीजिएगा।
इससे पहले निष्काम सेवा ट्रस्ट के महन्त रामचन्द्र दास समेत अन्य साधु-संताें ने महन्त परमहंस की आरती उतार व माल्यार्पण कर उन्हें तीर्थराज प्रयाग की यात्रा के लिए विदा किया। साथ ही आशीर्वाद दिया कि वह अपने कार्य में सफल हों।


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