सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह की शिकायत पर शुरू हुई जांच
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह की शिकायत पर बुधवार को टीएसी जांच टीम यहां पहुंची और विधायक के साथ सड़कों की जांच शुरू कर दी। टीएसी टीम की ओर से जांच शुरू होते ही ठेकेदारों और संबंधित विभागों के अफसरों में खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के बाद कई बड़ों पर कार्रवाई की जा सकती है। इसकी जद में पूर्व काबीना मंत्री विनोद कुमार सिंह पंडित सिंह तथा उनके कुछ चहेते हैं।
बताते चलें कि सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल में शहर में बनाई गई 19 सड़कों की टीएसी से जांच की मांग मुख्यमंत्री से की थी।
विधायक का आरोप है कि सपा सरकार में बनाई गई सड़कों में भ्रष्टाचार की बू आ रही है। इसलिए टीएसी जांच जरूरी है। विधायक द्वारा की गई शिकायत पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने टीएसी जांच का आदेश दिया था। बुधवार को जिले में आई टीएसी जांच टीम ने डाकखाना चौराहे से आईटीआई तक बनी सड़क की परत दर परत जांच की। लाखों की इस सड़क के निर्माण में प्रारंभिक जांच में खासी गड़बड़ी भी पाई गई है।
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| सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह |
सीसी रोड की गुणवत्ता की जांच के लिए टीम के तकनीकी अधिकारी सुनील कुमार ने रघुकुल विद्यापीठ स्कूल के पास रोड की लम्बाई और चौड़ाई नापने के बाद कोर कटिंग मशीन से मैटेरियल सेम्पलिंग के लिए निकाले हैं। बताया जाता है कि शहर के टामसन चौराहे से रामलीला मैदान होते हुए मनोरंजन चौराहा रोड, टामसन चौराहे से दुर्गा मंदिर होते हुए लखनऊ मार्ग तक, पुलिस लाइन मुख्य मार्ग से होते हुए विष्णुपुरी कालोनी तक, गोण्डा लखनऊ मार्ग से रानीपुरवा गांव तक, गोण्डा लखनऊ मार्ग से गायत्री पुरम चौराहे तक, आईटीआई चौराहे से प्रधान डाकघर चौराहे तक बनी सड़कें जांच के दायरे में आई हैं। शहर की कुल 19 'समाजवादी' सड़कों पर टीएसी जांच की आंच आई है। पहले चरण में 11 करोड़ की लागत से बनी 6 सड़कों की जांच की जानी है। टीएसी जांच शुरू होने से विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।
गुणवत्ता के साथ समझौता असंभव : प्रतीक भूषण
इस सम्बंध में सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अगर जांच में गुणवत्ता खराब आती है, तो इस पर पुन: बजट दिया जा सकता है, जिससे सड़कें फिर से ठीक हो सकें। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है। विकास कार्यों में पार्दर्शिता बहुत जरूरी है।
किसका है वतन कांस्ट्रक्शन.?
जिन सड़कों की जांच शुरू की गई है, उनकी लागत करीब 7 करोड़ 76 लाख बतायी जाती है। बताते चलें कि सपा शासनकाल में इन सड़कों को बनावाने की जिम्मेदारी वतन कांस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी को मिला था। बताते हैं कि यह कार्यदायी संस्था पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह के भाई महेश के पुत्र वतन सिंह की है। सत्ता के रसूख के बल पर इन्हें अधिकांश सड़कों के निर्माण का ठेका दे दिया गया था।
सपा सरकार के समय ही टेण्डर आदि की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, लेकिन इसी बीच सरकार चली गई और भाजपा शासनकाल में अधिकांश सड़कों का निर्माण कार्य कराया गया। निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी होने पर सड़कें बनने के बाद ही उजड़ने लगीं। इसकी शिकायत सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने मुख्यमंत्री से की थी, जिस पर सीएम ने टीएसी को जांच सौंप दी।
टीएसी टीम के इंचार्ज सुनील कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया दस इंच मोटी सड़क मिली है, जबकि इसकी मोटाई 16 इंच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इसमें पड़े मैटेरियल की जांच के लिए इसे लैब में भेजा जायेगा। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।



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