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गोंडा : तरबगंज में अबैध रूप से खुले आम बेचा जा रहा है नशे का जहर










रमेश कुमार मिश्र
 गोण्डा।गाँव की गलियों में बिक रही नशीली वस्तुएं युवाओं की जिंदगी तबाह कर रही है। आज शिक्षा ग्रहण करने  वाले युवकों को भी गांजे का कश लगाते देखा जा सकता है। हाई क्लास सोसाइटी में जहाँ नशा एक फैशन बन गया है 







हालाँकि इन पर प्रतिबंध तो लग पाना संभव नही है।लेकिन जिस वस्तु की बिक्री पर शासन ने रोक लगा रखी है उसकी बिक्री भी प्रतिबंधित नही हो पा रही है।
हम बात कर रहे है गांजा व भाँग की बिक्री जो की बन्द पुड़ियों में  क्षेत्र की कुछ चुनिंदा स्थानों पर खुलेआम बेंची जा रही है। सामाजिक मर्यादाओं के बंधन में बंधे होने के कारण ज्यादातर युवा गांजा व भाँग का नशा कर रहे हैं। तो उससे बचने वाले युवा नशीली दवाईयों का सेवन करते देखे जा सकते है। वहीं खांसी की रोक थाम के लिए प्रयोग किये जाने वाले कुछ सीरप युवा अपने नशे की लत को पूरा करने के लिये कर रहे है। इन सबकी विक्री पर प्रतिबंध तो लगाया गया था। लेकिन यह प्रतिबंध महज़ कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है।





बीते पांच से छः महीनों में एक भी नशे के कारोबारियों पर प्रशासनिक चाबुक नही चलाई गई है। बता दें कि क्षेत्र में कई वर्षों से गांजा व भाँग का अवैध कारोबार खुलेआम हो रहा है। गांव-गांव तक फैले नशे के यह व्यापारी तेजी से लोगों के बीच नशा बांट रहे हैं। इस अवैध व्यापार को रोकने के लिए नारकोटिक्स एक्ट बनाया गया है, लेकिन पुलिस व आबकारी विभाग गांजा व भाँग की बिक्री पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिससे ग्रामीण अंचल में फल-फूल रहे इस कारोबार से कई ज़िन्दगियाँ नशे की जद में आ चुकी है।





युवाओं में बढ़ती लत के चलते यह कारोबार खुलेआम चल रहा है, लेकिन इस पर अंकुश लगा पाने में पुलिस महकमा नाकाम साबित हो रहा है। ऐसा नहीं है पुलिस कार्रवाई नहीं करती, लेकिन इसके बाद भी बेखौफ करोबारी नशे के नाम पर मौत के सामान को खुले तौर से बांट रहे हैं। पुलिस कई बार गांजा भाँग व अबैध कच्ची शराब की भारी भरकम खेप पकड़ कर कारोबारियों को सलाखों के पीछे भी पहुंचा चुकी है।लेकिन  बावजूद इसके ये कारोबारी धड़ल्ले से गांजा भाँग की थोक व फुटकर बिक्री कर रहे हैं।
नशा कारोबारियों की मानें तो प्रतिदिन लगभग कयी हजारों का गांजा बिक रहा है।





इतनी बिक्री का एकमात्र कारण यह है कि यह कारोबार या तो पुलिस के संरक्षण में फल-फूल रहा है, या फिर पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है। इसका सेवन करने वालों को जहां मौका मिला चढ़ा लेते हैं। अक्सर देखा जाता है कि नशे के आदी व्यक्ति कहीं भी चिलम सुलगाने लगते है, चाहे वह सार्वजनिक स्थान हो या फिर खुला मैदान ! इतना ही नही इस तरह का नशा करने वाले लोग सड़क के किनारे भी बैठ कर चिलम चढ़ाते देखे जा सकते हैं। और तो और बाज़ार की कुछ चुनिंदा पान की ऐसी गुमटियां भी है जहाँ पर बिना लाइसेंस के भांग की पुड़िया भी बेची जा रही है, जिसका नाम “बम बम, महाकाल,त्रिकाल,पॉवर, सनन,सरगम,रखा गया है।वही दवा की दुकानो पर नशे की दवाईयां भी खुलेआम धड़ल्ले से बेची जारही है। जानकारी के अनुसार इस नशे को अधिकतर युवा एवं छोटे तबके के बेरोज़गार लोग कर रहे हैं और ऐसा समय भी आता है की जब पैसे ना होने के कारण ये नशे की गोली नही खरीद सकते तो इनके कदम अपराध की दलदल में चले जाते हैं।





बिकने वाले स्थान तरबगंज थानाक्षेत्र के सेझिया,बाबापुरवा,झामपुरवा,गौहानी,तरबगंज बाजार कटहा,रेतादलसिंह,रामापुर,नरायनपुर,पकड़ी,मनहना,राँगी,जुझारीपुर,महगीपुरवा आदि लगभग चार से पाँच दर्जन स्थानो पर होटल व मेडिकल स्टोर की आड़ में खुलेआम बेची जारही है अफीम,चरस,गाँजा,भाँग,अबैध कच्ची शराब।
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