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प्रयागराज:कल्पवासियों की कड़ी तपस्या को देखकर विदेशी अचंभित








सुनील गिरि 
प्रयागराज। माघ माह हिन्दु रीतिरिवाज में बड़ा ही शुभ महीना माना जाता है। ठंड के मौसम में पड़ने वाले माघ कल्पवासियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं होता है। एक माह तक संगम व गंगा यमुना के तट पर कल्पावसी गंगा मईया की शरण में रहकर दिन रात पूजा पाठ करते हैं। साथ चाहे जो भी हो तंबुओं की नगरी में ही रहते हैं।






 किसी वजहों से से यहां से गए तो उनकी वर्षों की तपस्या भंग मानी जाती है। प्रयागराज के पावन पवित्र धरती संगम नगरी में इस बार दिव्य कुंभ की शुरूआत ठंड की दस्तक से हुई, जो धीरे-धीरे चरम पर है। भीषण ठंड में भी लाखों कल्पवासियों में गूंज रहा है, जय हो गंगा मईया, करेंगी बेंड़ा पार। लेकिन इस बार तो कल्पवासियों की गंगा मईया पौष पूर्णिमा स्नान के बाद से ही विकट परीक्षा ले रही हैं। जहां एक ओर लोग भीषण ठंड के दस्तक से परेशान हो रहे हैं।




 वहीं बारिश के बादल भी मंडरा रहे हैं। इसके बावजूद कल्पवासी तंबुओं की नगरी में रहकर भगवान की पूजा पाठ भजन कीर्तन करने में लगे हैं और पूरे महीने कल्पवास कर दिव्य कुंभ, संगम की नगरी से जाएंगे। कल्पवासियों के तंबुओं में वो भी पहुंच रहे हैं जो सात समुन्दर पार करके विदेशी दिव्य कुंभ के रहस्यों को समझने के लिए आए हुए हैं। 



विदेशी कल्पावसियों के आस्था के आगे नतमस्तक हो जाते हैं और उनके द्वारा कंपकपाती ठंड में गंगा मईया की पूजा पाठ को करते देख दंग रहते हैं कि आखिरकार कल्पवासी भोर में उठकर नित्य क्रिया के बाद संगम अथवा गंगा व यमुना का स्नान कर परंपरा के मुताबिक पूजा पाठ करते हैं और अपने तंबुओं में जाकर एक बार फिर पूजा अर्चना करके मौजूद लोगों को प्रसाद वितरित करते हैं। साथ ही तंबुओं की नगरी में रहने वाले कल्पावसी तुलसी माता का पूजा और आरती करते हैं। इन दिनों तो संगम क्षेत्र ही भक्तिमय भाव में डूबा हुआ है और चारो ओर हर हर महादेव के साथ ही गंगा मईया की जयघोष से गूंज रहा है। यह सिलसिला भीषण ठंड में सुबह और शाम कल्पवासियों के द्वारा प्रति दिन किया जाता है। विदेशी कल्पवासियों से कल्पवास के रहस्यों को समझते हैं और उन्हें बारिकियों से जानने के लिए प्रयास करते हैं। 

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