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‘‘पूरबी‘‘ अध्यात्म की छांव में ‘‘पश्चिम‘‘:दिव्य कुंभ में भारतीय संस्कृति को देखकर विदेशी मंत्रमुग्ध









विदेशियों को सम्मोहित करती है भारतीय परंपरा
सुनील गिरि
कुंभ नगरी/प्रयागराज। पश्चिम पर पूरब के धर्म अध्यात्म और भारतीय परंपरा हमेश ही विदेशियों को सम्मोहित करती चली आ रही है। विदेशी हमेशा शांति की तलाश में भारत की ओर रूख करते हैं। शांति व सुकून की तलाश उन्हें प्रयागराज की पावन पवित्र संगम नगरी की धरती पर ही पूरी होती है। इस बार तो भारी पैमाने पर विश्वभर के कई देशों से विदेशी प्रयागराज के दिव्य कुंभ भव्य कुंभ, संगम नगरी में पहुंच रहे हैं और धार्मिक मेले में रूबरू होकर उसे समझने के लिए प्रयास कर रहे हैं। 







साथ ही भारतीय संस्कृति के अनेकों परांपरिक रूपों को देखकर मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। बता दें कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबमा जब चुनाव लड़ रहे थे, तो वह महाबली हनुमान जी का लाॅकेट हमेशा अपने साथ रखते थे और भारतीय सनातन धर्म में अपनी आस्था पहले ही व्यक्त कर दी थी। अमेरिका के आइवा सीटी के रहने वाले कई लोग वहां पर एक आश्रम के द्वारा संचालित विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग में प्रवक्ता पद पर तैनात हैं और भारतीय परंपरा के मुताबिक ही समस्त कार्यों को करते हैं। इस बार के दिव्य कुंभ में अमेरिका ही नहीं जापान, नीदरलैंड समेत कई अन्य देशों से आए विदेशी तीर्थयात्रियों को संगम की नगरी में भारतीय संस्कृति उन्हें जमकर लुभा रही है।






 यही वजह है कि वह भारतीय संस्कृति को अपने मुल्क में रहते हुए अपनाने से गुरेज नहीं करते हैं। बता दें कि भारतीय संस्कृति की बढ़ी लोकप्रियता के पिछे बीते महाकुंभ का प्रमुख योगदान रहा। जारी दिव्य कुंभ के दौरान संगम नगरी में पहुंचे रहे विदेशियों का जत्था यहां की तरह तरह की संस्कृति को देखकर उससे प्रभावित हो रहे हैं। खासकर विदेशी महिलाओं में प्राचीन भारतीय संस्कृति को लेकर अधिक लगाव रहा। कई विदेशियों ने बातचीत के दौरान बताया कि पश्चिम में वेद उपनिषदों के प्रति काफी हद तक आकर्षण बढ़ा है। 







इतना ही नहीं विदेशी भारतीय परंपरा के अनुसार वेश भूषा व अंग वस्त्रों को धारण कर भारतीय पहनावे को बढ़ावा देने में लगी हैं। वहीं दूसरी ओर विदेशी दिव्य कुंभ में आयोजित कई आखाड़ों में होने वाले प्रवचनों को भी बड़े ध्यान पूर्वक सुनते हैं और उसके रहस्यों के बारें में समझने के लिए प्रयास करते हैं। बातचीत के दौरान कई विदेशियों ने बताया कि यहां की भारतीय एवं धार्मिक संस्कृति किसी अजुबे से कम नहीं है। वह अपने अपने देशों में जाकर यहां की संस्कृति को संजोकर रखने के लिए कोशिश करेंगे। 

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