सुनील उपाध्याय
बस्ती । बहादुरपुर विकास खण्ड के अगौना गांव में जन्मे हिन्दी साहित्य के उज्जवल नक्षत्र आचार्य रामचन्द्र शुक्ल को उनके पुण्य तिथि पर नमन् किया गया। शनिवार को समाचार पत्र वितरक जन कल्याण सेवा समिति द्वारा कम्पनीबाग के निकट स्थित रासल पुस्तकालय पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुये समाजसेवी चिकित्सक डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि आलोचना के क्षेत्र में शुक्ल जी हिन्दी साहित्य के शिखर पुरूष हैं।
वरिष्ठ कवि डा. रामकृष्ण लाल जगमग ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल बीसवीं शताब्दी के हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार हैं। उनके द्वारा लिखी गई सर्वाधिक महत्वपूर्ण पुस्तक है हिन्दी साहित्य का इतिहास, जिसके द्वारा आज भी काल निर्धारण एवं पाठ्यक्रम निर्माण में सहायता ली जाती है। शुक्ल जी ने इतिहास लेखन में रचनाकार के जीवन और पाठ को समान महत्व दिया। हिंदी में पाठ आधारित वैज्ञानिक आलोचना का सूत्रपात उन्हीं के द्वारा हुआ। हिन्दी निबंध के क्षेत्र में भी शुक्ल जी का महत्वपूर्ण योगदान है।
कार्यक्रम को डा. सत्येन्द्रनाथ मतवाला, श्याम प्रकाश शर्मा, प्रमोद पाण्डेय आदि ने सम्बोधित करते हुये कहा कि आचार्य शुक्ल ने हिंदी, उर्दू, संस्कृत एवं अंग्रेजी के साहित्य का गहन अनुशीलन किया। उन्होंने ‘हिंदी शब्द सागर’ के साथ ‘नागरी प्रचारिणी पत्रिका’ का संपादन भी किया। आयोजक जय प्रकाश गोस्वामी ने आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये आचार्य शुक्ल की प्रमुख स्थान पर प्रतिमा स्थापित किये जाने की मांग किया। राजकुमार श्रीवास्तव, दुर्गेश कुमार मिश्र, दिलीप पाण्डेय, रामदेव राजभर, विजय प्रकाश गोस्वामी, पंकज पाण्डेय, कबीर तिवारी के साथ ही अनेक लोग उपस्थित रहे।


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