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पुत्र वियोग में दशरथ के उड़े प्राण पखेरू : शशि प्रभा








रानीगंज के बरहदा गांव में चल रही श्री राम कथा
शिवेश शुक्ला 
प्रतापगढ़ |  बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार... अवधपुरी में रामराज की सूचना से त्यौहार सा माहौल था, उधर देवताओं ने यह सोचा कि अगर श्रीराम राजा बन जाते हैं तो उनके अवतार लेने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा| पृथ्वी पर उनका अवतार तो ब्राह्मणों, गऊ, देव और संतों की रक्षा के लिए हुआ है | 




तब सभी देवताओं ने मां सरस्वती से विनती किया और सरस्वती मां ने कैकई की मति फेर दी| रानी ने राजा दशरथ से राम को चौदह वर्षों का वनवास और अपने पुत्र भरत को राजतिलक मांगा | उक्त विचार श्रीराम जानकी मंदिर बरहदा में समाजसेवी पंकज मिश्र द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के छठें दिन सुप्रसिद्ध कथा वाचिका शशिप्रभा ने राम वनवास की कथा के दौरान व्यक्त की | 


उन्होंने कथा में कहा कि राजा दशरथ ने श्रीराम को राज्य अभिषेक करने के लिए अगले दिन का फैसला किया| लेकिन रात्रि में ही सब कुछ परिवर्तित हो गया| रानी कैकेई ने राजा दशरथ से श्री राम के वनवास की बात कही तो मानों दशरथ पर बिजली सी गिर पड़ी हो, और वह अचेत हो जाते हैं| लेकिन रानी अपने वचनों पर अडिग रहती है| 


उधर राम के वनवास की सूचना पर पूरे नगर में उदासीनता छा गई| सभी ने इसका विरोध किया लेकिन पिता की आज्ञा पाकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम अनुज लक्ष्मण और सीता के साथ वन को चल पड़े| कथा में केवट के चरित्र का भी वर्णन किया गया| इस दौरान महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह, ग्रीनमैन अजय क्रांतिकारी, अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी, कमलेश शर्मा, पवन मिश्रा, विश्वनाथ त्रिपाठी, शिवसेना नेता आत्मप्रकाश त्रिपाठी, रमेश मिश्रा ,अजय पांडे सहित आदि श्रोतागण उपस्थित हो रहे | आयोजक पंकज मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया और बताया कि यह कथा शनिवार तक चलेगी और रविवार को महाप्रसाद के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन है |

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