ए. आर. उस्मानी/ मो. इरफान
गोण्डा। स्थानीय सीएचसी में प्रसव के दौरान लड़के की जगह लड़की देने के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन ने नवजात बच्ची का डीएनए परीक्षण कराने की रिपोर्ट सौंप दी है।
बताते चलें कि शुक्रवार की मध्य रात्रि कोतवाली करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम नारायनपुर माझा निवासी मिथलेश कुमार अपनी पत्नी संगीता का प्रसव कराने के लिए करनैलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया था, जहां भोर में करीब 3:30 बजे उसका प्रसव हुआ।
करीब 3 घंटे बाद उसे बच्चा सुपुर्द किया गया और उसको चार घंटे बाद बच्चे को कपड़ों से निकालने की सलाह दी गई।
यह आरोप लगाते हुए मिथलेश कुमार ने शनिवार को कहा कि उसकी पत्नी संगीता ने लड़के को जन्म दिया था और अस्पताल की स्टाफ नर्स द्वारा उसे बदलकर लड़की दी गई। इस मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन सकते में आ गया। काफी जद्दोजहद के बाद सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर सुरेश चंद्रा ने मामले की जांच करने के लिए टीम गठित की जिसकी जांच रिपोर्ट उन्हें देर रात्रि को मिल गई।
जांच अधिकारी डॉ. सुनील सिंह ने आरोपी एवं पीड़ित पक्षों के साथ वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों के बयान लिए और जांच रिपोर्ट सौंप दी। इस पर अधीक्षक ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को परिवार द्वारा लगाए गए आरोप एवं जांच रिपोर्ट संलग्न करते हुए अपनी तरफ से नवजात का डीएनए टेस्ट कराने का सुझाव भेज दिया।
वहीं दूसरी ओर पुलिस द्वारा रविवार को भी मामले की जांच की जाती रही। महिला थाने की प्रभारी भी प्रकरण की जांच करने पहुंचीं। अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा कहते हैं कि दो दिन में बच्चे का डीएनए टेस्ट करा लिया जाएगा। उसके बाद रिपोर्ट आने पर यदि कर्मचारी की गलती पाई जाती है तो उसके अन्यथा फर्जी शिकायत करने वाले के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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