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अजब पुलिस की गजब कहानी, बच्चा बदलने के मामले में पीड़ित के विरूद्ध पुलिस ने दर्ज किया केस










 दबाव बनाकर मामले को रफादफा करना चाहती है करनैलगंज पुलिस
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। करनैलगंज कोतवाली पुलिस अब बच्चा बदलने के आरोपियों के सुर में सुर मिलाने लगी है। बच्चा बदलने के आरोप के बाद पुलिस ने बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने के बजाय पीड़ित परिवार पर आरोपी की तहरीर लेकर जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया है, जिससे यह साफ हो गया है कि पुलिस मामले को दबाने के साथ सुलह समझौता करने की भूमिका बना रही है। 
    




करनैलगंज सीएचसी पर बच्चा बदलने के मामले में पुलिस ने नया मोड़ दे दिया है। बीते शुक्रवार को सांसद बृजभूषण शरण सिंह के कड़े रुख अपनाने के बाद पुलिस ने प्रसव कराने वाली स्टाफ नर्स समेत सीएचसी अधीक्षक एवं मेडिकल ऑफिसर सहित पांच लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया था। बताते चलें कि  कोतवाली करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम नारायनपुर माझा निवासी मिथलेश कुमार निषाद ने तहरीर दिया था कि गत एक मार्च की रात में वह अपनी पत्नी संगीता को अपनी मां के साथ करनैलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव कराने के लिए आया था। रात में करीब 3:30 बजे उसकी पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया।




जिसे उसकी मां व अन्य लोगों ने देखा कि लड़के का जन्म हुआ है। उसके बाद उसने खुशी के तौर पर आशा बहू और उसके पति संतोष कुमार यादव द्वारा स्टाफ के लोगों को देने के लिए तीन हजार रुपये भी दिलाया। बच्चे को ऑक्सीजन की कमी बता कर अंदर ले गए कमरे में बच्चा बदलकर लड़के की जगह लड़की को कपड़े में लपेटकर उसकी पत्नी को दे दिया गया और यह कहा गया कि 5 घंटे तक इसे कपड़े से मत निकालना। जब कपड़ा बदलने के लिए उसने खोला तो लड़के की जगह पर उसे लड़की दे दी गई। वह बच्ची को लेकर वापस करनैलगंज सीएचसी पहुंचा तो वहां अस्पताल के स्टाफ द्वारा गाली-गलौज करके भगा दिया गया।



 उसका आरोप है कि उसके गांव की आशा बहू का पति करनैलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दलाली का काम करता है। उसके द्वारा कोतवाली करनैलगंज, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया गया मगर उसकी एफआईआर पंजीकृत नहीं हुई। शुक्रवार को करनैलगंज सीएससी पर पहुंचे भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के सामने महिला प्रस्तुत हुई जिस पर सांसद ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली करनैलगंज को तत्काल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने के लिए कहा।




 इस पर पुलिस ने शनिवार को मिथलेश कुमार निषाद की तहरीर पर डॉक्टर सुरेश चंद्रा अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, आशा पांडेय स्टाफ नर्स, डॉक्टर मुदस्सिर मेडिकल ऑफीसर, उर्मिला यादव आशा बहू एवं आशा बहू के पति संतोष कुमार यादव को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात के विरुद्ध अपहरण, जालसाजी, धोखाधड़ी  एवं गाली-गलौज का मुकदमा पंजीकृत किया था।




 वहीं कोतवाली पुलिस ने मामले का पटाक्षेप कराने के लिए बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने के बजाय आरोपी संतोष कुमार यादव की तहरीर पर पीड़ित पक्ष के परिजनों सहित उसके सहयोगियों राजेश, मौजीलाल, घनश्याम, दीपक, धनीराम, अखिलेश व किशोर पर बलवा, जानलेवा हमला, गाली गलौज और धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। 




इससे यह साफ हो गया है कि पुलिस आरोपी की तरफ से मुकदमा पंजीकृत कर दोनों पक्षों को सुलह करने के लिए बाध्य करने में लगी हुई है। इतना ही नहीं मुकदमा दर्ज होने के तत्काल बाद पुलिस की एक टीम ने पीड़ित परिवार के घर दबिश भी दी जिससे पूरा परिवार सहमा हुआ है।




 कोतवाल राजेश कुमार सिंह कहते हैं कि तहरीर और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है। दूसरी ओर पीड़ित परिवार ने डीआईजी को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
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