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गन्ना पर्ची के लिए बलरामपुर के किसान गन्ना समितियों का चक्कर लगाने को हुए मजबूर










अखिलेश्वर तिवारी 
बलरामपुर ।। जनपद बलरामपुर में सबसे अधिक गन्ने की खेती की जाती है । जिले के गन्ना किसान इस समय गन्ना पर्ची ना मिलने के कारण काफी मायूस वा परेशान हैं । गन्ना किसान गन्ना समितियों के चक्कर लगाकर परेशान हैं और संबंधित अधिकारी कर्मचारी किसानों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील नहीं दिखाई दे रहे हैं । 








जिला गन्ना अधिकारी से लेकर सचिव और क्षेत्रीय सुपर्वाइजर तक समस्याओं के निदान करा पाने में अक्षम दिखाई पड़ रहे हैं जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है ।गन्ना किसानों के परेशानी का एक कारण इस वर्ष की गन्ना सप्लाई नीति को भी माना जा रहा है ।

                        






जानकारी के अनुसार- जिले के कुल कृषि योग्य भूमि का 60 से 70% भूभाग पर गन्ने की खेती की जाती है । पिछले वर्षों में गन्ना सप्लाई की समस्याएं कम रहती थी । माना जा रहा है कि उस समय जिले में स्थापित तीन चीनी मिलो द्वारा गन्ना किसानों को पर्चियां उपलब्ध कराई जाती थी । चीनी मिलें अपने आवश्यकतानुसार तथा किसानों की सुविधा के अनुसार पर्चियां जारी करना तथा तौल ना होने वाली परियों को बदलने जैसी सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराती थी ।








 चीनी मिलों द्वारा पर्चियां जारी करने की व्यवस्था से किसान भी काफी संतुष्ट रहते थे ।किसानों का कहना है कि इस वर्ष प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना सप्लाई के लिए पर्ची नीति में बदलाव कर दिया गया है । अब गन्ना पर्ची आकाश सॉफ्टवेयर नामक एक नोडल एजेंसी के द्वारा लखनऊ से किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है ।









 एसी रूम में बैठ कर बनाई गई नीति के कारण गन्ना किसान काफी परेशान है । माना ए भी जा रहा है कि इस वर्ष बनाई गई नीति में गन्ना किसानों की बेसिक समस्याओं को ध्यान में नहीं रखा गया है जिसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं । काफी बड़ी तादात में गन्ना किसान तो ऐसे हैं जिनको अभी तक एक भी गन्ना सप्लाई पर्ची नहीं मिली है । 








किसी का पेड़ी गन्ना खड़ा है तो किसी के पास अभी पौधे की कटाई शुरू नहीं हो पाई है । गन्ना ना बिकने से किसानों की आर्थिक समस्याएं भी हल नहीं हो पा रही हैं । शादी विवाह मुंडन जैसे मांगलिक कार्यक्रम में भी बाधा उत्पन्न हो रही है ।आगे खेती की तैयारी हो या फिर दवा तथा रोजमर्रा के खर्चे गन्ने के बिक्री के बाद ही भुगतान आने पर संभव हो पाता है ।







 ऐसे में गन्ना समय से नहीं बिक रहा है तो किसानों को दोहरा मार देना पड़ रहा है । एक ओर गन्ना खेतों में खराब हो रहा है वहीं दूसरी ओर किसानों को आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है । मिलो द्वारा गन्ना किसानों के खेतों में अर्ली गन्ने की बुवाई तो करा दी गई जिसका हर हाल में फरवरी तक कटान हो जाना चाहिए परंतु मार्च बीत रहा है और अभी तक पौधे गन्ने की कटाई शुरू ही नहीं हो पाई है । इन सब के लिए किसान गन्ना की नई नीति को जिम्मेदार ठहरा रहे ।

                  







   गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर गन्ना विभाग के अधिकारी भी काफी परेशान नजर आ रहे हैं ।गन्ना समितियों पर रोज लगने वाली भीड़ से अधिकारी हलकान है । हजारों की संख्या में गन्ना किसान समितियों में अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं जिन का निराकरण कराने का आश्वासन गन्ना अधिकारियों द्वारा दिया जा रहा है परंतु निदान नहीं हो पाने के कारण किसान बार-बार समितियों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं । 







गन्ना समिति के सचिव अभिषेक कुमार सिंह का कहना है कि वह प्रतिदिन गन्ना किसानों की समस्याओं को सुनते हैं और उनका निदान कराने का पूरा प्रयास कर रहे हैं । देर रात तक समस्याओं के निदान के लिए प्रयास जारी रहता है । इस वर्ष गन्ना पर्ची जारी करने का जिम्मा प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ की नोडल एजेंसी आकाश सॉफ्टवेयर को सौंपा गया है जिसके द्वारा गन्ना किसानों की कैलेंडरिंग तथा फीडिंग का कार्य समय अनुसार नहीं हो पा रहा है । हम लोग लगातार सुधार कराने का प्रयास कर रहे हैं । 







सचिव का मानना है कि शीघ्र ही समस्याओं का निदान भी करा लिया जाएगा । किसानों के प्रतिनिधि के रूप में गन्ना डायरेक्टर चंद्रभान पांडे का कहना है कि गन्ना किसानों की समस्याओं के निदान के लिए गन्ना अधिकारियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और सचिव समस्या हल करने के लिए काफी मेहनत भी कर रहे हैं । आशा है की शीघ्र ही समस्याओं का निदान भी हो जाएगा ।

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