ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। खाता ना बही, जो पुलिस कहे वही सही ! यह कहावत जिले की छपिया पुलिस पर फिट बैठती है, जो जब जिसके विरूद्ध चाहे उसके ऊपर मामूली धारा से लेकर संगीन आपराधिक मामलों में आरोपी बना सकती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें वादी बनाए गए व्यक्ति द्वारा मुकदमा दर्ज कराने की बात से मुकरने के बाद पुलिस की कार्यशैली कटघरे में खड़ी हो गई है और इलाके में उसकी छीछालेदर हो रही है।
मामला छपिया थाना क्षेत्र के घनश्यामपुर का है।
यहां के निवासी सपा नेता अतीतानंद तिवारी ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते छपिया पुलिस पर फर्जी तरीके से एनसीआर दर्ज करने का आरोप लगाया है। सपा नेता का कहना है कि छपिया पुलिस उनका उत्पीड़न कर रही है। उन्होंने इसकी शिकायत देवीपाटन परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक से करते हुए न्याय की गुहार की है।
समाजवादी पार्टी के युवा नेता अतीतानंद तिवारी का आरोप है कि छपिया पुलिस ने उनके विरूद्ध राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते बिना दूसरे पक्ष के थाने पर गये ही एनसीआर दर्ज कर लिया। चौंकाने वाली बात तो यह है कि जिस व्यक्ति को उक्त एनसीआर का वादी बनाया गया है, वह इस तरह के मामले से पूरी तरह अंजान है। इस मामले में वादी द्वारा स्वयं शपथपत्र देकर कोई भी मुकदमा दर्ज न कराने की बात कही गयी है। सपा नेता अतीता नंद तिवारी के खिलाफ एनसीआर दर्ज कराने वाले व्यक्ति ने शपथपत्र लिखकर दे दिया है कि उसने छपिया थाने में न तो कोई लिखित शिकायत की और न ही एनसीआर ही दर्ज कराया है।
इस मामले में छपिया पुलिस द्वारा वादी बनाए गये व्यक्ति के मुकरने और शपथपत्र देने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इस मामले से छपिया थानाध्यक्ष अनभिज्ञता जता रहे हैं। थानाध्यक्ष एसबी सिंह ने बताया कि मामले की छानबीन कराई जा रही है।



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