इटियाथोक में हुआ होली मिलन और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन
खूब सराही गयीं युवा कवयित्री कविता तिवारी की रचनाएं
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। इटियाथोक कस्बे के खरगूपुर मार्ग पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को होली मिलन समारोह व अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में लखनऊ की मशहूर कवयित्री कविता तिवारी ने राष्ट्र के लिए ओजपूर्ण कविताएं पढ़ कर लोगों के दिलों को जीत लिया। उनकी कविताओं पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजायीं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक विनय कुमार द्विवेदी व विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष पीयूष मिश्र, जिलामंत्री आशीष त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
शहीद दिवस पर देश के नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं और हास्य व्यंग्य के गीत प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। मध्य प्रदेश के मशहूर हास्य कवि डॉ. रमेश धुरंधर ने मंच का संचालन किया।
युवा कवयित्री कविता तिवारी ने सरस्वती वन्दना से कार्यक्रम की शुरूआत की। उन्होंने वन्दना करते हुए कहा - यह सारी धरा तुम्हारे यहां गीत गा रही है, ऐसा लगे माँ तू मधुरिम वीणा बजा रही है। हास्य व्यंग्य के शायर गीतकार दिनेश पांडेय नज़र इलाहाबादी ने अपनी रचनाओं से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। उन्होंने पढ़ा - गड्ढों से मुक्ति सड़कों की यह वादा मेरा है, सारे गड्ढे भर जाएंगे बस बरसात तो आने दो। प्रख्यात शायर वाहिद अली वाहिद ने कहा- पूजा करो या नमाज़ पढ़ो, बस तुम एक नेक इंसान बनो, जब तुम बनो तो महान बनो, तब समुद्र झुके तुम वीर हनुमान बनो।
हास्य व्यंग्य के मशहूर रचनाकर प्रमोद पंकज ने पढ़ा कि - केवल मोदी एक अनार, माया ममता सोनिया सौ बीमार। देश के प्रति अपनी रचना को प्रस्तुत करते हुए कवि अमित पांडेय ने कश्मीर के लिए गीत पढ़ा- मुझसे मेरा दर्द न पूछो, मैं कश्मीरी पंडित हूं, अपने ही घर में मारा गया, मैं कश्मीरी पंडित हूं। देश प्रेम पर विनय शुक्ला ने पढ़ा कि - जो गए तो गए पर यह कहकर गए, हम रहें न रहें यह वतन तो रहे, उनको मत भूलना बस उन्हें पूजना, जिनका लहू तिरंगे के खातिर बहा, उनको शत शत नमन। आसनसोल से आए हास्य व्यंग्य कवि बांके बिहारी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगने पर व्यंग्य किया। कवि के व्यंग्य पर श्रोताओं ने खूब ताली बजाई।
प्रेम के कवि चंदन राय मुंबई ने कहा कि - मुहब्बत में हैं कितने गम यह बतला नहीं सकते, यह होती भी उसी से है जिसे हम पा नहीं सकते। देश की ओज और देश भक्ति के साथ श्रृंगार की कवि कविता तिवारी ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत करते हुए कहा - धन द्रव्य सम्पदा तो नहीं मांग रही हूं, जो मांग रही हूं वह सही मांग रही हूं, कविता की पंक्ति-पंक्ति राष्ट्र जागरण बने, आशीष आप सब से यही मांग रही हूं। उन्होंने देशहित के लिए शहीद हुए सैनिकों के सम्मान में कहा - भले दौलत की ताकत से खरीदो दुनिया को, शहादत की कोई दौलत हो ही नहीं सकती।
कवि सम्मेलन में टाटम्बरी सहित अन्य रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से सबको ओत प्रोत किया।
इस दौरान अजय मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी रामराज, एबीआरसी अनुराग मिश्रा, दिनेश शुक्ला, कमलकांत शुक्ला, दद्दन शुक्ला, सरस शुक्ल, पंछी मिश्रा, डॉ. एमके माथुर, संतोष चौरसिया, मनोज दुबे, स्वामी नाथ उपाध्याय, संजय तिवारी, रवि चतुर्वेदी, मनोज तिवारी, पदुमनाथ शुक्ल, डॉ. दिनेश तिवारी, रवीन्द्र कश्यप, मनोज मिश्रा, धीरेन्द्र तिवारी, जितेंद्र मौर्य, चंदू सोनी, ज्ञान प्रकाश शुक्ला, शफीक सिद्दीकी सहित बड़ी संख्या में लोग देर रात तक मौजूद रहकर कार्यक्रम का आनन्द लेते रहे।




एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ