गोंडा: चैत्र नवरात्र को लेकर देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की उमड़ रही है लोग माता के स्वरूपों की पूजा करने के साथ ही अपने जीवन के सुखी होने की मंगलकामना करते हैं वैसे तो यहाँ हर रोज श्रद्वालुओ का तांता लगा रहता है लेकिन शारदीय नवरात्र या फिर चैत्र मास के नवरात्रि में 9 मां भक्तों की भारी भीड़ जुटी रहती है
मनकापुर कसबे में स्थित पौराणिक देवी मंदिर श्रद्वालुओ के आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है यहां प्रतिदिन सैकड़ों मां भक्त पूजा अर्चना करने के साथ मन्नतें मांगते हैं जो पूरी भी होती है | इस पौराणिक देवी मंदिर में प्रतिवर्ष कथा भागवत भंडारा मुंडन व विवाह जैसे संस्कार भी संपन्न कराए जाते हैं
यहाँ कैसे देवी माँ की हुई उत्पत्ति
ऐसी मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्री राम चारों भाई श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न गुरुकुल में अपने गुरु से शिक्षा ग्रहण रहे थे विद्या में निपुणता के बाद गुरु वशिष्ट ने भगवान श्रीराम को धनुर्विद्या की परीक्षा देने का आदेश दिया गुरु का आदेश पाकर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने चारों दिशाओं में बाण छोड़े |
मान्यता है कि पूर्व पश्चिम और दक्षिण दिशा में छोड़े गए बाण भगवान श्री राम के तरकस में पुनः वापस आ गए लेकिन उत्तर दिशा में छोड़ा गया बाण एक विकराल जंगल में जा कर के नीम के पेड़ से टकराया और तत्पश्चात वहां रसातल में चला गया | जिससे एक देवी प्रकट हुई जिन्हें कालांतर में श्री बाण देवी के नाम से जाना गया | और समय अंतराल के बाद यह स्थान श्री बाणगढ़ देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्व हुवा |
कैसे पहुचे माँ के दरबार
दूर दराज से आने वाले माँ भक्तो के लिए सर्वोत्तम साधन ट्रेन है जो श्री बाणगढ़ देवी मंदिर से महज एक किलो मीटर पूरब स्थित है यदि सडक मार्ग से होते पश्छिम दिशा से आगमन करते है तो कसबे के मध्य मुख्य मार्ग ( स्टेशन मार्ग) पर होते हुए श्री बाणगढ़ देवी मंदिर सुगमता से पहुच सकते है |



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