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पढ़िये डॉ.शिवानी सिंह "मुस्कान" की काव्य रचना "प्यार"






मौन दृगों की भाषा प्यार|
जीवन की परिभाषा प्यार||

सारा जगत प्रेम का भूँखा
हर दिल की अभिलाषा प्यार||

दिल के सब दरवाजे खोलो
सदा प्रेम की बोली बोलो
कुछ लेकर ना आना- जाना
आपस मे मत नफरत घोलो

जब भी तन्हा हो जाओगे
देगा सदा दिलासा प्यार|

सारा जगत प्रेम का भूँखा
हर दिल की अभिलाषा प्यार||

संघर्षो मे सदा है रहना ,
सुख -दुख सबको मिलकर सहना
कुछ तुम कहना ,कुछ तुम सुनना,
साथ सभी के खुल कर हसना

उम्मीदों से बढ़कर देगा
जीने की फिर आशा प्यार ||

सारा जगत प्रेम का भूँखा 
हर दिल की अभिलाषा प्यार||

डॉ.शिवानी सिंह "मुस्कान"
                प्रवक्ता 
  राष्टीय पी. जी. कालेज, सुजानगंज, जौनपुर (यूपी)

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