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डीआईजी साहब ! मोतीगंज में दरोगा के संरक्षण में परवान चढ़ रहा कच्ची शराब का कारोबार





ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारत निर्वाचन आयोग के साथ ही मंडलायुक्त, डीआईजी, जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक तक अवैध रूप से बनाई और बेची जा रही कच्ची जहरीली शराब पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाए जाने के सख्त फरमान जारी कर चुके हैं। बैठकों में भी आला अधिकारियों द्वारा इस बारे में बार-बार चेतावनी दी जाती रही है, लेकिन मोतीगंज पुलिस अपनी मनमर्जी ही कर रही है। सच तो यह है कि छापेमारी के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। हल्का दरोगा और सिपाहियों की निरंकुशता के चलते मोतीगंज थाना क्षेत्र के हल्का नंबर एक के दर्जन भर से अधिक गांंवों में पुलिस संरक्षण में कच्ची जहरीली शराब का अवैध कारोबार परवान चढ़ रहा है।
     



गोण्डा जिले का मोतीगंज थाना क्षेत्र अवैध रूप से बनाई और बेची जाने वाली कच्ची जहरीली शराब का गढ़ है। इस थाना क्षेत्र के सौ से अधिक गांवों में यह धंधा कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। इन दिनों अवैध रूप से बनाई और बेची जा रही कच्ची जहरीली शराब को लेकर मोतीगंज थाने का हल्का नंबर एक सुर्खियों में है। एक तरफ आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है, वहीं दूसरी तरफ मोतीगंज थाना क्षेत्र में अलग-अलग गांंवों और मजरों के लगभग सैकड़ों घरों में अवैध कच्ची शराब बनाने और बेचने का धंधा जोरशोर से चल रहा है। सूत्रों के अनुसार मोतीगंज थाना के हल्का नंबर एक में कच्ची शराब निर्माण और बिक्री के लिए कुख्यात बनकसिया, पेड़ारन, केवलपुरा, तुर्काडीहा, दिनारा बनकट, राजापुर कपूरपुर, सोहांस करमोहनी के 100 से अधिक घरों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाई जाती है।
       


जहरीली शराब के लिए कुख्यात बनकसिया गांव में दर्जनभर से अधिक घरों में खुलेआम शराब का गोरखधंधा परवान चढ़ रहा है। सूत्र बताते हैं कि इस अवैध कारोबार को परवान चढ़ाने में हल्का दरोगा और सिपाहियों की अहम भूमिका होती है क्योंकि इसके बदले इन्हें प्रतिमाह एक निर्धारित मोटी रकम मिलती है। पुलिस के करीबी सूत्र बताते हैं कि अकेले हल्का नंबर एक से हर महीने कच्ची शराब के कारोबारियों द्वारा पुलिस को करीब 50 हजार का चढ़ावा चढ़ाया जाता है। बताया जाता है कि शासन और प्रशासन की सख्ती के बाद इलाकाई पुलिस महज खानापूर्ति के लिए तोड़फोड़ करने का दिखावा कर अधिकारियों कथित तौर पर अभियान चलाने की तस्वीरें भेज देती है, जिस पर अधिकारी भी आंखें बंद करके भरोसा कर लेते हैं, 


जबकि हकीकत यह है कि थाने की पुलिस उन्हें गुमराह करती है। इसका खुलासा पुलिस द्वारा शराब कारोबारियों के विरूद्ध की जाने वाली कार्रवाई से ही होता है। दरअसल, पुलिस छापेमारी में शराब की बरामदगी तो दिखाती है, लेकिन इसके धंधेबाजों की गिरफ्तारी अपवाद ही रहती है। यदि सूत्रों पर भरोसा करें तो सैकड़ों कुंतल लहन नष्ट करने का पुलिस का दावा भी फर्जी रहता है। करीब तीन साल पहले मोतीगंज क्षेत्र के बनकसिया में एक व्यक्ति की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। गढ़ी गांव में भी कच्ची शराब के सेवन से पिछले दो वर्षों में कई लोग असमय ही काल के गाल में समा चुके हैं। इसके अलावा हल्का नंबर एक के कई गांवों में लोग कच्ची जहरीली शराब पीकर मौत को गले लगे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद इलाकाई पुलिस को गरीबों की जन और धन हानि की चिंता नहीं है।


 वह तो सिर्फ मोटी कमाई में लगी हुई है। यही वजह है कि आला अधिकारियों की लाख कोशिशों के बाद भी मोतीगंज क्षेत्र में कच्ची शराब का कारोबार दिनों दिन परवान चढ़ता जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि कच्ची शराब बनाने वाले लोगों और घरों के बारे में हल्का पुलिस को जानकारी न हो। सूत्रों की मानें तो प्रत्येक घर से ढाई हजार से लेकर तीन हजार रूपये तक प्रति माह वसूली की जाती है। इसके बदले में धड़ल्ले से सैकड़ों की संख्या में अवैध शराब की भट्ठियांं धधकती हैं।
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