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कभी राजनैतिक परिवेश में लाया था भूचाल , अब इस मुद्दे को भुनाने में जुटी भाजपा व कांग्रेस





अमरजीत सिंह 
अयोध्या ब्यूरो । पाटियों का दफ्तर हो या चाय की दुकान, वर्तमान में फैजाबाद लोकसभा में अगर किसी मुद्दे की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वह शशि हत्याकांड की। सवाल यह है कि क्या इस चुनाव में यह मुद्दा प्रभावी रहेगा। भाजपा अनुसूचित मोर्चा के सम्मेलन मे आये पूर्व डीजीपी बृजलाल मंच पर इस मुद्दे का जिक्र कर चुके है। पिछले दो लोकसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा व कांग्रेस को इससे लाभ मिलने का दावा राजनैतिक जानकार करते है।
            


मुद्दा इसलिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बन जाता है क्योकि यह गठबन्धन के प्रत्याशी से जुड़ा हुआ। 22अक्टूबर 2007 को कानून की छात्रा शशि अचानक गायब हो गयी। जिसमें तत्कालीन खाद्य संस्करण मंत्री आनंदसेन के ड्राईवर विजयसेन से पुलिस ने पूछताछ की। 30 अक्टूबर को विजयसेन व सीमा आजाद पर शशि हत्याकांड का मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आनंदसेन का इस्तीफा ले लिया। गठबन्धन प्रत्याशी द्वारा दिये गये हलफनामे के अनुसार पहले उन्हें विशेष सत्र न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट ने दोषी मानते हुए17.5.2011 को आजीवन कारावास की सजा सुनायी। परन्तु हाईकोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद अभी सुप्रीम कोर्ट में स्टेट बनाम आनंदसेन विचाराधीन है।
           


 इस मुद्दे ने सेन परिवार के राजनैतिक परिवेश में भूचाल ला दिया था। वर्तमान में भाजपा व कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाने में लगी है। इसका बड़ा कारण है कि शशि से जुड़ा अनुसूचित जाति का तबका है। वर्तमान में बसपा व सपा का गठबन्धन भी है। सपा के सामने सबसे बड़ी दिक्कत मुद्दे में हाईकोर्ट के निर्णय को जनता को ठीक तरह से बताने की होगी। वहीं आने वाली रैलियों में भी इस मुद्दे की गूंज सुनायी दे सकती है।

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