Type Here to Get Search Results !

Action Movies

Bottom Ad

आज के राजनीतिक स्थित को बयां करती "मिथिलेश द्विवेदी अकेला" की लाजवाब गज़ल







चुनावी दौर है, हैराँ न हो सब यार देखा है।
पुरानी शक्ल में अक्सर नया किरदार देखा है।।

हुकूमत लाख बदली कुछ नए चेहरे भले आए।
ग़रीबों से मगर वो ही पुराना प्यार देखा है।।


सियासत चीज़ ही ऐसी, कहीं की भी नहीं रखती।
वफ़ादारों को भी होते हुए ग़द्दार देखा है।।

इबादत के लिए उठते नहीं जो हाथ ऊपर को।
उन्हीं हाथों में हमने मज़हबी तलवार देखा है।।

ये शाही ठाट जिनके देख कर हैरान होते हो।
इन्हें बिकते हुए हमने सर -ए- बाज़ार देखा है।।

बहाते आँख से आँसू वतन के वास्ते हमने।
सियासी कूचे में ऐसे भी कुछ ख़ुद्दार देखा है।।

'अकेला' देखना सूरत बदल जाएगी ये इक दिन।
के नस्ल-ए-नौ में हमने कुछ नया किरदार देखा है।।

मिथिलेश द्विवेदी "अकेला" इलाहाबादी

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Below Post Ad

Comedy Movies

5/vgrid/खबरे