अखिलेश्वर तिवारी
बलरामपुर ।। जनपद बलरामपुर के अधिकांश कृषि योग्य भूमि पर मुख्य रूप से किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं । गन्ना बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण ही इस जिले में तीन चीनी मिलों की स्थापना की गई है । तीन चीनी मिलों में से एक बजाज ग्रुप की तथा दो चीनी मिलें बलरामपुर चीनी मिल समूह की हैं ।
बजाज ग्रुप की इटई मैदा स्थित चीनी मिल की पेराई क्षमता अधिक होने के बावजूद भी वहां पर किसान गन्ना देना नहीं चाह रहे जिसके कारण काफी कम दिनों तक ही पेराई सत्र चल सका है । इसके विपरीत बलरामपुर चीनी मिल की दोनों चीनी मिल बलरामपुर तथा तुलसीपुर मे अधिकांश गन्ने की पेराई का कार्य किया गया ।बीसीएम ग्रुप की मुख्य बलरामपुर यूनिट में इस वर्ष रिकॉर्ड चीनी का उत्पादन कर मिल में पेराई सत्र 2018 -19 अंतिम रूप से 2 मई को समाप्त कर दिया गया ।
बलरामपुर चीनी मिल के अधिशासी अध्यक्ष व ग्रुप कामर्शियल एडवाइजर नरेश कुमार खेतान ने हमारे प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए बताया की बलरामपुर चीनी मिल का इतिहास रहा है कि उसके द्वारा किसानों के संपूर्ण गन्ने की पेराई करने के बाद ही मिल में पेराई सत्र समाप्त किया जाता है । इस वर्ष भी चीनी मिल द्वारा सभी किसानों के गन्ने की पेराई करने के बाद अंतिम रूप से 2 मई को पेराई सत्र समाप्त किया गया ।
उन्होंने बताया कि 164 दिन के पेराई सत्र में मिल में कुल 156. 27 कुंटल गन्ने की पेराई करके 18 लाख 20 हजार कुंतल से अधिक चीनी का उत्पादन किया है ।इस वर्ष गन्ने की रिकवरी का औसत प्रतिशत संतोषजनक 11.68% रही । पेराई सत्र 2018 -19 के लिए बलरामपुर चीनी मिल में गन्ना पेराई का कार्य 20 नवंबर 2018 को प्रारंभ किया गया था जिसका समापन अंतिम रूप से 2 मई 2019 को किया गया । उन्होंने बताया कि किसानों के गन्ने का भुगतान भी मार्च महीने तक दे दिया गया है । शेष भुगतान भी शीघ्र ही समय समय पर भेजा जाता रहेगा ।



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