दोहरी कर की मार झेल रहा मेंहदावल नगरवासी
जमींदारी प्रथा से कब आज़ाद होगा मेंहदावल कस्बा
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। मेंहदावल नगर पंचायत की स्थापना आज करीब सौ साल से ऊपर हो गया है।आज के मेंहदावल में शासन से तमाम सुविधाओं से आच्छादित भी किया गया है।फिर भी जमींदारी प्रथा से मुक्ति दिलाने की पहल में कोई भी राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी तो हर जनप्रतिनिधिमें देखनी को मिलती रही। आज आज़ादी के 70 साल से अधिक बीत जाने के बाद भी नगर में आज भी जमींदारों को बिना नजराने के कोई भी कार्य करवाना नामुमकिन है।
जहाँ भारतीय संविधान में जमींदारी को खत्म करने का प्रावधान किया गया।जमींदारी विनाश अधिनियम द्वारा जहाँ सभी जगह पर जमींदारी प्रथा को समाप्त किया गया। वही मेंहदावल नगर में जमींदारी प्रथा का जिंदा रहना एक तरह से गुलामी की प्रथा को जीवित रखता है। एक तरफ हज़ारो मेंहदावल नगरवासी जहाँ नगर पंचायत में हाउस टैक्स आदि सभी करो को जमा करते है। वही इस बाबत भवन निर्माण,खिड़की खोलने आदि कार्य करवाने में जमींदार भी अपना नजराना वसूलते है।
जिससे मेंहदावल की जनता पर दोहरी कर की मार झेलना पड़ता है। आज शासन ने जहाँ मेंहदावल को थाना, तहसील, बसस्टेशन, ब्लॉक आदि अनेको जरूरी सुविधाओं से नवाजा है, तो वही पर मेंहदावल नगर वासी जमींदारी जैसे काले कानून से मुक्त क्यो नही हो पा रहा है।क्या आज़ाद भारत मे मेंहदावल नगर को जमींदारी प्रथा से मुक्ति मिल पाएगी, जो ब्रिटिश कालीन प्रथा की अवधारणा को साबित कर रहा है। जिससे नगर में गुलामी की दास्तान को बयां कर रहा है।
भारत देश को आज़ादी मिलने के बाद लोकतांत्रिक देश मे एक तरह से जमींदारी प्रथा की दंश को सह रहा है।प्रदेश में आज तक जितनी भी सरकारे आयी चाहे वह सपा, बसपा, कांग्रेस आदि ने पूरी इच्छाशक्ति से इस प्रथा को समाप्त करने की जहमत नही उठाई। आज की भारतीय जनता पार्टी के पूर्ण बहुमत की सरकार के विधायक राकेश सिंह बघेल द्वारा शासन को जमींदारी की प्रथा को समाप्ति हेतू भाजपा की सरकार बनने के बाद जमींदारी के समाप्त करने हेतू शासन को एक पत्र के द्वारा शासन को अवगत भी कराया गया है लेकिन आज दो साल बाद भी भाजपा की वर्तमान जमींदारी से मुक्त करने के लिए कोई भी सार्थक कदम नही उठाया गया। जिससे आम जनमानस में कोई संदेश नही पहुँचा।
भाजपा के विधायक द्वारा जमींदारी के समाप्ति हेतू पत्र को कब तक संज्ञान में लेकर कदम उठाया जाएगा। कुछ दिन बाद लोकसभा के चुनाव का मतदान भी होना है लेकिन इस बार भी किसी प्रत्याशी के नजर में जमींदारी प्रथा को समाप्त करने का कोई भी वक्तव्य नही आया। क्या अब आने वाले लोकसभा चुनाव के संपन्न होने के बाद नए जन प्रतिनिधि द्वारा कोई कदम उठाया जाएगा या मेंहदावल नगरवासियों में जमींदारी का दंश झेलने की मजबूरी बनी रहेगी। देश मे एक मजबूत सरकार के बाबत विज्ञापन चलता ही रहता है जबकि मेंहदावल नगर के जमींदारी को समाप्त कर नगरवासियों की मजबूरी कब खत्म करेगा। अब यह तो भविष्य के गर्भ में है। नगरवासी आने वाले चुनाव के बाद नई सरकार के इंतजार में है क्योंकि हर बार इसी आस में वोट देते है कोई तो इस पर गम्भीरता से पहल करेगा।
इसी जमींदारी प्रथा के कारण मेंहदावल में अनेको कार्य अपने अंजाम तक नही पहुच पा रहे है। इसी कड़ी में मेंहदावल नगर के ठाकुर द्वारा मंदिर के पोखरे का पुनः निर्माण में एक शिरा पिछले कई साल से अटका पड़ा हुआ है। जिससे मुहल्ले के तमाम निवासियों में रोष है।मंदिर के पोखरे जैसे धर्मार्थ कार्य मे जमींदारी प्रथा से प्रभावित है। आज प्रदेश की कमान एक महंत देख रहे है। जिससे मंदिर आदि के कार्य को प्रमुखता से पहल करनी चाहिए।जिससे एक अपूर्ण पोखरा अपने पूर्णता को प्राप्त होकर लोक हितकारी बन जाये। नगर पंचायत में भी लोगो द्वारा हाउस टैक्स आदि को जमा किया जाता है। आज भी नगरवासी अपने घर आदि के निर्माण करवाने में बिना जमींदारी दिए नही हो पाती है। जो आम जनमानस को बेहद ही परेशान करती रहती है।
वही इस बाबत आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष आशीष कुमार गुप्त का कहना है कि नगर में जमींदारी के दंश से अमीर गरीब सभी पीड़ित है।स्थानीय विधायक द्वारा सरकार के समक्ष इसके समाप्ति हेतू उठाये गए प्रयास सफल हो।जिससे जमींदारी प्रथा से मुक्त होकर एक आज़ादी की पर्याय को साबित कर सके।


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