राकेश गिरी
बस्ती। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने जीआईसी ग्राउण्ड में काग्रेस प्रत्याशी राज किशोर सिंह के पक्ष में चुनावी जनसभा को सम्बोधित किया। प्रियंका गांधी ने अपने सम्बोधन के दौरान बीजेपी पर जमकर हमला बोला, उन्होंने कहा की बीजेपी के नेता एक ही चीज में बहुत मजबूत हैं, प्रचार में, पूरी तरह से अच्छा-अच्छा प्रचार करते हैं, ये लोग राष्ट्रवाद की बात करते हैं, आप की मीटिंग में आकर पाकिस्तान की बात करते हैं,
लेकिन हिन्दुस्तान की बात नहीं करते, ये इस को राष्ट्रवाद नहीं समझते की किसान की सुनवाई होनी चाहिए, कि नौजवान के लिए रोजगार ढूंढना चाहिए, ये इन के मुताबित राष्ट्रवाद नहीं है, इन्होंने पूरी तरह से आप की उम्मीदों और आशाओं को ठुकराया है, इन्होंने 5 साल पहले कहा था की आप को खातों में 15 लाख रूपए डाले जाएंगे, क्या आप को मिले 15 लाख, उन्होंने कहा था की हर साल 2 करोड़ नौजवानों को रोजगार मिलेगा, क्या आप को रोजगार मिले, इन के शासन काल में 5 करोड़ रोजगार घट गए हैं,
नोटबंदी की वजह से 50 लाख रोजगार घटे हैं, एक भी रूपया कालाधन पिछले पांच सालों में देश में नहीं आया है। दिल्ली में किसानों ने पीएम से 5 मिनट मिलने का समय मांगा, किसानों ने कहा हमारी समस्याओं को सुन लीजिए, हम कर्ज में डूब रहे हैं तो प्रधानमंत्री ने अपने किसान भाइयों के लिए 5 मिनट का समय नहीं निकाला, अपने आलीशान बंगले पर बैठे रहे, वही प्रधानमंत्री जिन्होंने इतना समय निकाला की वो अमेरिका चीन के प्रधानमंत्री से गले मिल सके, पाकिस्तान में उन्होंने बिरयानी खाई, जापान जा कर ढोल बजाए, लेकिन वो अपने हिन्दुस्तानी किसानों के बीच में नहीं दिखे,
उन के दिल में इतनी देश भक्ति नहीं है की आप के बीच आएं, जब आप के नंगे पांव में छाले लगे हों और आप हजारों की तादाद में उन के दरवाजे तक आते हो तब भी वह आप के लिए समय नहीं निकालते, तो आप सोंच सकते हैं, बड़े-बड़े मंचों पर अपने सीने की नाप तो दे देते हैं की 56 इंच का मेरा सीना है लेकिन अपने दिल का नाप भी तो बताएं दिल है भी उस सीने के अंदर की नहीं, वो किसान जब कर्ज में डूब रहे हैं, तो आप ने उन की सहायता के लिए कुछ नहीं किया, किसानों से हर महीने बीमा लिया, उस बीमे की राशि से आप के उद्योगपति दोस्तों को 10 हजार करोड़ रूपए का फायदा हुआ।
प्रियंका गांधी ने कही की अगर आप गांव-गांव किसानों के बीच जाते कम से कम आप को यह तो पता चलता कि आवारा पशु के नाम क्या रखे हैं हमारे देश वालों ने, लेकिन आप तो प्रचार के लिए बड़े-बड़े मंचों पर आते हैं, लोगों से घुलते-मिलते नहीं हैं, आप का नाता टूट चुका है जनता से आप सोंचते हैं सत्त खुद की है अहंकार हो गया है, सत्ता किसने दी वो तो आप भूल गए हैं, तमाम जनता तरस्त और परेशान है और आप फिजूल की बात करते हैं।


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