ताल व पोखरे हुए बेपानी, कैसी बुझेगी पशु पक्षियों की प्यास
बनारसी चौधरी
बेलहर, संतकबीरनगर। बेलहरकलां ब्लॉक के अधिकतर ग्राम पंचायतों में पोखरा व ताल तलैया में पानी न होने से आखिर कैसे बुझेगी पशु पक्षियों की प्यास? जिम्मेदार अधिकारी व ग्राम प्रधान नहीं दे रहे हैं ध्यान शासन की मंशा को लगा रहे हैं पलीता
बताते चले कि बेलहरकलां ब्लॉक के अनेकों ग्राम पंचायतों में अनेको पोखरो की खुदाई कराई गई व पोखरो का सौंदर्यीकरण भी किया गया। जिस बाबत जिम्मेदारो द्वारा लाखो की लागत से पोखरों के सौंदर्यीकरण कराया गया था आज लगभग उन सभी पोखरों मे इस भीषण गर्मी के मौसम में एक बूंद भी पानी नहीं रह गई है। जबकि पशु पक्षियों का पानी बगैर बेहाल हो रहे है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारी की लापरवाही साफ दिखती नजर आ रही है
प्रकृति के इस मार से आम जनजीवन भी त्रस्त नजर आ रहा है। इस भीषण गर्मी से और भूगर्भ के जल स्तर घटने से ताल और पोखरे सूख गए हैं। जिसने मवेशियों के लिए खुले में पेयजल की समस्या धीरे धीरे खड़ी नजर होती आ रही है। तालाब में पानी भरवाने के लिए अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है अगर यही स्थिति रही तो आने वाले गर्मी को पशु पक्षियों के लिए और भी भयावह होगा। वर्तमान स्थिति यह है कि मनरेगा से बेलहर ब्लॉक में अनेकों ग्राम पंचायतों में कार्य हुआ है। फिर भी पोखरे में एक बूंद भी पानी नहीं है।
लाखों रुपए की लागत से प्रत्येक ग्राम पंचायतों में पोखरे कि खुदाई कराई गई लेकिन आदर्श जलाशय के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। तालाबों को खुदवाने का मकसद था कि जल संरक्षण के साथ भूगर्भ जल स्तर बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही पशु पक्षियों की प्यास बुझाई जा सके, लेकिन बेलहर ब्लाक के अधिकांश जलाशयों की वर्तमान स्थिति यह है कि पोखरे अपना अस्तित्व को खोता जा रहा है अनेको ग्राम पंचायतों में सूखे ताल, पोखरे बेमतलब साबित हो रहे हैं।
आज हालत यह है कि ना पोखरे में पानी है ना ही अन्य कोई ऐसा स्थान है कि जहां पानी भरा हो जिसे देख कर या कहा जा सके की यह आदर्श जलाशय के रूप में पुस्ट किया जा सके। आदर्श जलाशय योजना में भारी लापरवाही का अंदाजा लगाया जा रहा है। वर्तमान परिस्थितियां यह है कि आदर्श जलाशय पर शासन की तरफ से बैठने के लिए चारों तरफ से बेंच का निर्माण कराए जाने के लिए साथ ही सौंदर्यीकरण भी कराया गया था परंतु रखरखाव के अभाव में वर्तमान समय में आदर्श जलाशय के अगल-बगल के लगे कटीले तार भी गायब हो गए हैं और बने चबूतरे भी टूट फूट गए हैं।
बेलहर ब्लाक के ग्रामपंचायत जंगल दशहर, लोहरौली, भेलाखर्ग कला, कान्हापार, पवरिहा, राजस्व गाँव सिहाझूरी, अवरहिया मंझरिया, गुनाखोर, बरगदवा, भेडोरा पिकौरा, मनैतापुर आदि ग्राम के पोखरों की स्थिति देखने को मिला है।
पशु पक्षियों को पानी न होने से परेशानी हो रही हैं प्यास के कारण अपने जीवन को खो रहे है। ऐसे में शासन के अधिकारी व कर्मचारी ऑखे मूंद कर बैठे हैं। पोखरे में पानी लबालब भरा होने से पशु पक्षियों को आराम मिलता है। वहीं गर्मी के मौसम में आग लगने से कितने घर जल जाते हैं ऐसे में दमकल कर्मियों के न पहुंचने से पहले ग्रामीण इलाको में इसी पोखरों में पम्पिंग सेट लगाकर ग्रामीणों के सहयोग से आग पर तत्काल काबू पाया जाता था। आज इन पोखरों व तालाबो में पानी न होने से अपनी दुर्दशा को बयां कर रहा है।


एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ