सुनील उपाध्याय
बस्ती :आज चंद्रमणि पाण्डेय ने वित्तविहीन प्रबंधक शिक्षक स्वाभिमानी मंच के बैनर तले स्कूलों की मान्यता सम्बन्धी समस्याओ को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात की।
चन्द्रमणि पांडेय ने कहा कि हर्रैया स्थित एस.डी. चिल्ड्रेन एकेडमी के जूनियर की मान्यता हेतु वर्ष 2009 में आवेदन किया गया था किंतु बाद में कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि पत्रावली गुम हो गई है ऐसी दशा में 2014 में जूनियर की मान्यता के लिए पुनः आवेदन किया गया किंतु जहां अभी तक एस.डी. चिल्ड्रेन एकेडमी को जूनियर की मान्यता नहीं मिल पाई वहीं पर वर्ष 2009 में मान्यता प्रत्यावेदन का लगने वाला शुल्क 12500 लगने वाला शुल्क 2014 में 33000 और वर्तमान में 150000 रुपया कर दिया गया है जो कि सरासर निशुल्क शिक्षा देने की सरकार की मंशा के विरुद्ध है तथा यह सिद्ध करता है|
कि रिश्वत के चक्कर में पत्रावलियां लम्बित रह जाती है महोदय एक तरफ हम कक्षा 1 से 8 तक के छात्र छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा देने के बड़े बड़े वादे करते हैं दूसरी तरफ हम निजी विद्यालयों के मान्यता पत्रावली को निस्तारित नहीं करते उपर से बिना मान्यता विद्यालय संचालन पर रोक लगाते व प्रत्यावेदन का मनमाना शुल्क बढ़ाते हैं। जिससे विद्यालय का कार्य तो प्रभावित ही होता है |
समाज में साख भी गिरती है। हर्रैया ही नहीं बस्ती जनपद में जिन विद्यालयों ने मान्यता का प्रत्यावेदन किया है। उनकी पत्रावली उसी एफडीआर पर शीघ्र निस्तारित कराने दोषी अधिकारियों को दण्डित करने विद्यालय संचालकों को हुई मान हानि की प्रतिपूर्ति दिलाने व निःशुल्क शिक्षा अभियान को ध्यान में रखते हुए मान्यता प्रत्यावेदन शुल्क वापस लेने के संदर्भ में उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें |
ताकि अधिकाधिक विद्यालय मान्यता की श्रेणी में आ सकें व अभिभावकों का शोषण रूके कारण आवश्यकता से अधिक मान्यता प्रत्यावेदन का भार कहीं न कहीं छात्रों व अविभावकों पर ही पडेगा मान्यता प्राप्त विद्यलयों के छात्रों को भी सरकारी व अनुदानित विद्यालयों की भांति सुविधाएं दी जायें कारण वो भी भारत के ही भविष्य है।


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