● किशोरों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तन्दुरुस्ती के सिखाए गए गुर
● एचआर इण्टर कालेज में ‘तन्दुरुस्ती हजार नियामत’ कार्यक्रम हुआ आयोजित
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। हीरालाल रामनिवास इण्टर कालेज में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयोजित तन्दुरुस्ती हजार नियामत कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी वेद प्रकाश यादव ने कहा कि हमारा शरीर जैसे जैसे किशोरावस्था में पहुंचता है, उसमें सामाजिक, शारीरिक और मानसिक बदलाव आते है। इसके साथ ही इस पर कई तरह की बीमारियों और बुराइयों का भी आक्रमण होता है। इससे हमें बचने की जरुरत है।
कार्यक्रम के दौरान एचआईवी एड्स के साथ ही अन्य यौन रोगों के बारे में भी छात्रों को बताया। साथ ही इसे लेकर जागरुक भी किया।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला कोऑर्डिनेटर दीनदयाल वर्मा ने छात्रों को किशोर स्वास्थ्य के छः प्रमुख बिंदुओं क्रमश: पोषण, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, गैर संचारी रोगों, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन, एवं लिंग आधारित हिंसा पर जानकारी देते हुए विस्तार से किशोरों से चर्चा किया । ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम) दिव्या श्रीवास्तव ने विभाग द्वारा राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चलाये जा रहे किशोर स्वास्थ्य क्लिनिक एडवोल्सेन्ट फ्रेण्डली हेल्थ सर्विस क्लीनिक , विफ्स (साप्ताहिक आयरन फोलिक सम्पूरन कार्यक्रम), किशोरी सुरक्षा योजना, पीयर एजुकेटर्स कार्यक्रम आदि के महत्व एवं आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में प्रश्नोत्तरी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 10छात्रों को प्रधानचार्य उदयभान सिंह, इन्द्रेश धर दूबे व कोऑर्डिनेटर दीनदयाल वर्मा द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया ।
■ समस्या हो तो आएं किशोर क्लीनिक
इस दौरान किशोर स्वास्थ्य काउन्सलर दयानाथ तिवारी ने किशोरों में व्याप्त विभिन्न शारीरिक मानसिक समस्याओं एवं उनके समाधान की बात कही। साथ ही कहा कि खान पान, पोषण, शरीर में आयरन की आवश्यकता, एनीमिया की समस्या, एचआईवी, कम उम्र में विवाह से उत्पन्न समस्याओं इत्यादि के निराकरण के लिए जिला अस्पताल में किशोर स्वास्थ्य क्लीनिक की स्थापना की गई है। किशोर यहां पर आकर अपनी समस्याओं का निराकरण पा सकते हैं।
■ नाटक मण्डली बोली, गलत संगत छोड़ें
इस मौके पर गोण्डा से आये नाटक मंडली की मंजू सिंह, चंद्रप्रकाश,लल्लन, रिंकू दूबे, छोटे आदि कलाकारों ने युवाओं के गलत राह पर भटकने एवं बुरी संगत से बचने की बात कही। उन्होने लोक गीतों के माध्यम से सावधान किया । वहीं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से वर्तमान परिवेश में युवाओं के नशाखोरी के तरफ होने वाले आकर्षण और शारीरिक, पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर उसके प्रभाव का आकर्षक चित्रण किया।

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