ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। बुधवार को गोण्डा में विश्वविद्यालय की मांग को लेकर युवा समाजसेवी अविनाश सिंह के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को दिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की मांग पूरी न होने पर बड़े पैमाने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गयी है।
विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष अविनाश सिंह ने कहा कि जनपद गोण्डा में विश्वविद्यालय की बहुत ही आवश्यकता है। यहां की आबादी 40 लाख से भी अधिक है, जिसमें 7 विधानसभा व 2 लोकसभा क्षेत्र आते हैं। यह देवीपाटन मण्डल का मुख्यालय भी है। अगर यहांं शिक्षा की बात की जाए तो हर जगह शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम हुआ है, लेकिन जनपद गोण्डा में न सरकारी महाविद्यालय है और न ही महिला महाविद्यालय। यहां पर एक अर्धसरकारी महाविद्यालय है, जिसमें भी सीटें लिमिटेड रहती हैं, जिससे हर साल सैकड़ों छात्र प्रवेश से वर्जित रह जाते हैं, परंतु छात्रों की परेशानियों को अनदेखा कर दिया जाता है।
अविनाश सिंह ने कहा कि जिले से हर वर्ष लाखों की संख्या में छात्र इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करते हैं लेकिन स्नातक के लिए जिले में केवल एक ही वित्त पोषित कॉलेज है, जिनमें सीटों की संख्या अपेक्षा से काफी कम है। ऐसे में बचे हुए छात्र या तो निजी महाविद्यालयों में प्रवेश को मजबूर होते हैं या फिर उन्हें जिले से बाहर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि देवीपाटन मण्डल को छोड़कर उत्तर प्रदेश के सभी मण्डलों में विश्वविद्यालय की स्थापना हो चुकी है।
यहां तक कि बस्ती, आजमगढ़ और सहारनपुर जैसे छोटे मण्डलों में भी राजकीय विश्वविद्यालय खोले जा चुके हैं, किन्तु पंडित अटल बिहारी बाजपेयी को पहली बार चुनकर लोकसभा में भेजने वाला जिला आज भी विश्वविद्यालय के लिए मोहताज है। वर्ष 1991-92 के राम लहर में गोण्डा-बलरामपुर संयुक्त जनपद से 11 विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे थे। 2012 के चुनाव में जिले की सात में से छह सीटों पर सपा विधायक जीते, जिसके बलबूते अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने। 2017 के चुनाव में एक बार फिर जिले की जनता ने सभी सातों सीट भाजपा की झोली में डाल दिया, किन्तु राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के चलते स्वास्थ्य व शिक्षा के मामले में जिला उपेक्षित रहा। राजनीतिक इच्छा शक्ति के बदौलत ही जौनपुर जैसे छोटे से जिले में भी करीब ढाई दशक पूर्व पूर्वांचल विश्वविद्यालय खोला जा चुका है। मात्र दो जिले के मण्डल सहारनपुर में राजकीय विश्वविद्यालय खोला जा चुका है।
अखिलेश सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे माता प्रसाद पाण्डेय ने इच्छा शक्ति दिखाई तो बस्ती मण्डल के सिद्धार्थ नगर जिले में नेपाल की सीमा के समीप सिद्धार्थ विश्वविद्यालय खोल दिया गया, किन्तु दुख की बात है कि गोण्डा जिले की सुध लेने वाला कोई नहीं।
इस अवसर पर प्रवेश शर्मा ने कहा कि अगर किसी छात्र का किसी प्रकार की गलती हो जाये तो उसे फैजाबाद जाना पड़ता है जिसमें उनको कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है जो कि उनके परिवार के ऊपर बोझ पड़ता है। फूलचंद गुप्ता व सुनील तिवारी ने कहा कि सरकार को इस बात पर जल्द फैसला लेना चाहिए क्योंकि छात्र ही देश का भविष्य हैं जिसके लिए जनपद में को अच्छी शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
ज्ञापन देने वालों में अविनाश सिंह, प्रवेश शर्मा, फूलचंद गुप्ता, सुनील तिवारी, अभय तिवारी, संतोष तिवारी, विनय शुक्ला, अभिषेक शाही, विवेक शुक्ला व सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
युवाओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही विश्वविद्यालय को लेकर कोई फैसला न लिया गया तो बहुत बड़ा आंदोलन जनपद में किया जाएगा।


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