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131 टीबी रोगियों को राज्‍यपाल के समक्ष गोद लेंगे स्वयंसेवी


■ 19 वर्ष से कम आयु के 131 टीबी रोगियों की करेंगे निगरानी, खिलाएंगे दवा
■ स्‍वास्‍थ्‍य विभाग कर चुका है स्‍वयंसेवियों के साथ बैठक, तय हो गई रणनीति

आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। 19 वर्ष से कम आयु के 131 टीबी रोगियों को कुछ स्वयंसेवी राज्‍यपाल श्रीमती आनन्‍दी बेन पटेल के समक्ष गोद लेंगे। इस आयोजन लिए आवश्‍यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रेडक्रास व रोटरी क्‍लब के स्‍वयंसेवियों के साथ स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों की बैठक भी सम्‍पन्‍न हो चुकी है।

सीएमओ डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने बताया कि स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को लेकर महामहिम राज्‍यपाल काफी संवेदनशील हैं। टीबी को भारत से 2025 तक जड़ से समाप्‍त करना है। इसे ध्‍यान में रखते हुए राज्‍यपाल की मंशा यह है कि 19 वर्ष से कम आयु के टीबी रोगियों को स्‍वयंसेवी संस्‍थाएं गोद ले लें तथा उनकी जिम्‍मेदारी का निर्वहन करें। स्‍वयंसेवी यह भी देखें कि टीवी की दवाएं वे खा रहे हैं कि नहीं, साथ ही उन्‍हें पर्याप्‍त पोषण मिल रहा है या नहीं। टीबी रोगियों को पर्याप्‍त पोषण मिलेगा तो उनका टीबी रोग दूर होगा। साथ ही साथ टीबी फैलेगी भी नहीं। 19 वर्ष से कम आयु के जिले के कुल 131 टीबी रोगियों का इसके लिए चयन किया गया है। इन टीबी रोगियों को रोटरी क्‍लब और रेडक्रास सोसायटी के बीच बांटा गया है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ ए के सिन्‍हा ने बताया कि रोगियों को इस प्रकार से बांटा गया है कि स्‍वयंसेवियों के घर से उनके घर की दूरी ज्‍यादा न हो ताकि उनको निगरानी करने में असुविधा न हो सके।

स्वयंसेवियों में जिम्मेदारी को लेकर उत्साह

रोटरी क्‍लब के रामकुमार सिंह, डॉ डीएन पाण्‍डेय, विवेक छापडि़या, उमाशंकर पाण्‍डेय, डॉ एन एन श्रीवास्‍तव, कैलाशपति रुंगटा के साथ ही रेडक्रास सोसायटी के डॉ अशरफ अली, डॉ एनपी मिश्रा, डॉ ए के खान, सुभाष चन्‍द्र शुक्‍ला, पवन कुमार श्रीवास्‍तव आदि लोगों ने इस बात को लेकर उत्‍साह है कि उन्‍हें सेवा को एक अवसर मिल रहा है। रामकुमार सिंह कहते हैं कि रोटरी ओर सेवा एक दूसरे के पर्याय हैं, यह गौरव की बात है कि हमें पीडि़त मानवता की सेवा का अवसर मिल रहा है।
क्या होगी स्वयंसेवियों की जिम्मेदारी

स्‍वयंसेवियों की जिम्‍मेदारी यह होगी कि वे जिस टीबी रोगी को गोद लिए हुए हैं उनको अपने सामने नियमित दवाओं की डोज दिलवाएं। साथ ही उनके लिए पोषण भत्‍ते के साथ ही पोषक आहार की भी व्‍यवस्‍था करें। अगर पोषण की कमी के चलते किसी अन्‍य बीमारी जैसे बुखार, टायफाइड, मलेरिया आदि की चपेट में आ जाएं तो उनका इलाज करवाएं। कुल मिलाकर एक अभिभावक की भूमिका अदा करनी है।

युवा टीबी रोगियों पर क्यो है जोर

19 वर्ष से कम आयु के टीबी रोगियों पर यह जोर इसलिए दिया जा रहा है कि ऐसे टीबी रोगियों की दिनचर्या काफी अनियमित होते हैं और दवाओं को खाने में भी लापरवाही बरतते हैं, इसलिए इन्‍हीं पर काफी जोर दिया जा रहा है। ताकि ये शीघ्र ही स्‍वस्‍थ हो सकें और समाज निर्माण में अपनी भूमिका अदा कर सकें।

क्षेत्रवार 19 साल से कम उम्र के टीबी रोगी

स्‍वास्‍थ्‍य सेवा क्षेत्र बघौली में 15, हैसर बाजार में 7, खलीलाबाद में 30, मेंहदावल में 13, नाथनगर में 10, शनिचरा बाजार में 7, सांथा में 20, सेमरियांवा में 27 व वाह्य सीमावर्ती क्षेत्र के 3 ऐसे टीबी रोगी हैं जिनकी उम्र 19 साल से कम है।


‘‘एक टीबी रोगी के लिए यह महत्‍वपूर्ण है कि वह समय से दवाओं की डोज ले। साथ ही उसे बेहतर पोषण मिले। इन्‍हीं दो बातों पर फोकस है। 19 साल से कम आयु के जिले में कुल 131 क्षय रोगी हैं। जिनकी देखभाल की जिम्‍मेदारी स्‍वयंसेवियों को दी जाएगी । दवा और अन्‍य सहयोग जिला क्षय रोग विभाग के द्वारा निरन्‍तर किया जा रहा है।’’
डॉ एस डी ओझा
जिला क्षय रोग अधिकारी

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