अमरजीत सिंह
अयाेध्या। धर्मनगरी के भगवदाचार्य स्मारक भवन में गाेस्वामी तुलसीदास की ५२२वीं जयंती बुधवार काे धूमधाम के साथ मनायी गई। इस अवसर पर एक गाेष्ठी का भी आयाेजन हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में अंजनी गुफा रामकाेट के महन्त रामायणी राममंगल दास माैजूद रहे। उन्हाेंने अपने सम्बाेधन में कहाकि भारत के साथ-साथ आज लाेग विदेशाें में भी गाेस्वामी जी की जयन्ती मना रहे हैं। हर सनातन धर्मावलम्बियाें काे उनकी जयन्ती मनानी चाहिए।
तुलसीदास ने रामचरित मानस जैसे पवित्र ग्रंथ की रचना की है। वह कवि मात्र ही नही थे। उन्हाेंने सर्वसमाज काे दिशा और दशा देने का काम किया। संत की दृष्टि पूरे समाज के लिए हाेनी चाहिए। उनकी रचना सर्वकालिक व सर्वदैशिक है। गाेस्वामी ने आदर्श चरित्र में पूरे समाज के लिए राम काे रखा है। मनुष्य को चरित्रवान हाेना चाहिए यही मानस का सिद्धांत है। समाज की प्रतिष्ठा काे पुन: स्थापित करना है। ताे तुलसीदास की कही बाताें काे अपने अन्दर उतारना हाेगा।
कार्यक्रम आयाेजक सनातन धर्म सेवा संस्थान अध्यक्ष स्मृति शरण ने बताया कि प्रात:काल गाेस्वामी तुलसीदास के चित्रपट व मानस का पूजन-अर्चन हुआ। तत्पश्चात उन्हें माल्यार्पण कर श्रद्धासुुमन अर्पित किया गया। उन्हाेंने कहाकि जयंती से एक दिन पहले पूर्व संध्या पर वृक्षारोपण का भी कार्यक्रम किया गया। गाेष्ठी में मुख्य रूप से मानस मर्मज्ञ राजमंगल दास, अयाेध्या दास, कृष्णा तिवारी, रामायणी आरती, मालविका, राधेश्याम, मदन मिश्र एडवोकेट आदि माैजूद रहे।


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