सुनील उपाध्याय
बस्ती । अखिल भारत वर्षीय गांेड महासभा केे राष्ट्रीय महामंत्री रामनाथ गोंड के संयोजन में शुक्रवार को विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासियों के हितों के लिये संघर्ष करने वाले ज्ञात अज्ञात शहीदों को नमन् कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। इसी क्रम मंे सोनभद्र में जमीनी विवाद में हुये नरसंहार में प्राण गंवाने वाले गोंड समाज के लोगों को सुभाष चन्द्र तिराहे पर मोमबत्तियां जलाकर नमन् किया गया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में रामनाथ गोंड ने कहा कि आदिवासियों का सवाल आर्थिक से ज्यादा सांस्कृतिक है, आदिवासियों के बीच संस्कृतीकरण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, आदिवासी जिन विशेषताओं से परिभाषित होते हैं, वे ही उनसे छिनती जा रही हैं. उनको उनके ही इलाके से बेदखल किया जा रहा है। पूंजीवादी विकास की तमाम प्रक्रियाओं में उनकी हैसियत एक दिहाड़ी मजदूर से ज्यादा कुछ नहीं रही. विस्थापन से भाषा, संस्कृति व परिवेश से उनका रिश्ता टूटता जा रहा है. वे अस्तित्व की रक्षा के लिए गैरों की शर्तों पर जीने को मजबूर हैं।
कहा कि आदिवासियों के अधिकारों, उनकी जमीनों, संस्कृति पर लगातार हमले हो रहे हैं ऐसे में सरकारों को उन्हें संरक्षण देने की जरूरत है। यदि अधिकारियों ने गरीब आदिवासियों, गोंड समाज के लोगों की बात सुनी होती तो सोनभद्र में नरसंहार न होता।
आदिवासियों को उनका अधिकार दिलाने और सोनभद्र जमीनी विवाद में नरसंहार में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में गंगाराम गोंड़, काशी प्रसाद, सुख्राम, अनुज कुमार, उमाकान्त, रामलखन, श्याम बिहारी, रामजगत, डा. बलराम, विनोद कुमार, गनेश कुमार गौतम, राम दरस गौतम, श्याम, राम सेवक, बनारसी, शशि गांेड़ के साथ ही गोंड महासभा के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता शामिल रहे।


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