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बच्‍चों के लिए पहला प्राकृतिक टीका है एक घण्‍टे के अन्‍दर स्‍तनपान – डॉ मोहन झा


● लेबर रुम से वार्ड में शिफ्ट करने से पहले ही करा दें स्‍तनपान – डीपीएम
● स्‍तनपान सप्‍ताह के अन्‍तर्गत सीएचसी खलीलाबाद में हुई जागरुकता गोष्‍ठी

आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी आरसीएच डॉ मोहन झा ने कहा कि जन्‍म के एक घण्‍टे के अन्‍दर स्‍तनपान बच्‍चों को पूरी तरह से प्रतिरक्षित करने का प्राकृतिक टीका है। इसलिए यह आवश्‍यक है कि जन्‍म के एक घण्‍टे के अन्‍दर शिशु को मां का पहला गाढ़ा दूध पिला दिया जाए। इससे बच्‍चे के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
यह बातें उन्‍होने सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खलीलाबाद में स्‍तनपान सप्‍ताह के दौरान आयोजित जागरुकता संगोष्‍ठी को सम्‍बोधित करते हुए कही। इस दौरान डीपीएम विनीत श्रीवास्‍तव ने कहा कि जब भी किसी महिला का प्रसव कराया जाय तो लेबर रुम से वार्ड में शिफ्ट करने से पहले ही शिशु की स्किन साफ करने के पश्‍चात मां के सीने पर रखकर स्‍तनपान करा दें। ताकि मां का पहला गाढ़ा दूध शिशु के शरीर में जाए और उसे अनेक बीमारियों से प्रतिरक्षित करे। इससे बच्‍चे का मां के प्रति लगाव भी पैदा होता है। साथ ही मां को भी स्‍तन कैंसर का खतरा नहीं रहता है। स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा अधिकारी वेद प्रकाश यादव ने कहा कि स्‍तनपान शिशुओं के लिए एक अमूल्‍य आहार है। वह बच्‍चों को जीवन भर विभिन्‍न बीमारियों से प्रतिरक्षित करता है। सर्विलांस अधिकारी डॉ ए के सिन्‍हा ने कहा कि संस्‍थागत प्रसव के साथ होम डिलीवरी के दौरान भी लोगों को इस बात के लिए जागरुक करें कि वे बच्‍चों को मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाएं। इस बात के लिए जागरुक करना होगा।
गोष्‍ठी के दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एस डी ओझा, इपिडेमियोलाजिस्‍ट डॉ मुबारक अली, सहायक मलेरिया अधिकारी सुनील चौधरी, बीपीएम अ‍भय त्रिपाठी, बीपीसीएम महेन्‍द्र त्रिपाठी, आशा संगिनी सरोज यादव के साथ ही खलीलाबाद ब्‍लाक की एएनएम, आशा कार्यकर्तागण तथा सीएचसी खलीलाबाद के कर्मचारी व अधिकारीगण उपस्थित रहे।

*एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं ने जागरुकता का लिया संकल्‍प*

संगोष्‍ठी में आई मगहर नगरीय स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र की एएनएम रजनी पीटर बताती हैं कि वे माताओं को निरन्‍तर स्‍तनपान के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही उन्‍हें स्‍तनपान के लाभ से भी अवगत कराती हैं। आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी के जरिए वे निरन्‍तर इसका प्रचार प्रसार करेंगी। एएनएम बड़गो पूर्णिमा भारती, एएनएम अशरफाबाद रेनू संगम, देवरिया गंगा स्‍नेहलता राय ने भी स्‍तनपान जागरुकता का संकल्‍प लिया। वहीं दूसरी तरफ बनियाबारी की आशा कार्यकर्ता सुनीता बताती हैं कि वे जब जब डिलिवरी के लिए महिलाओं को लेकर आती हैं तो स्‍तनपान और टीकाकरण पर जोर देती हैं। बयारा की द्रौपदी, बनकटिया की सुनीता और नगवा की अनुराधा ने भी जागरुकता पर बल देने की बात कही।

*डीपीएम ने जानी स्‍तनपान की हकीकत*

कार्यक्रम के पश्‍चात डीपीएम विनीत श्रीवास्‍तव सीएचसी खलीलाबाद में स्थित महिला विंग में गए। वहां पर रात्रि में दो प्रसव हुए थे। इन दोनों प्रसव के बारे में जानकारी लेते हुए उन्‍होने वहां तैनात स्‍टाफ नर्स और महिला चिकित्‍सकों से बच्‍चों के स्‍तनपान के बारे में जानकारी ली। साथ ही वे वार्ड में भी गए तथा भर्ती महिलाओं से यह पूछा कि उनके बच्‍चों को जन्‍म के 1 घण्‍टे के अन्‍दर स्‍तनपान कराया गया है कि नहीं। महिलाओं ने यह बताया कि 1 घण्‍टे के अन्‍दर ही स्‍तनपान कराया गया है। उन्‍होने इसे रजिस्‍टर पर मेण्‍टेन करने के लिए भी कहा।

■ उत्‍तर प्रदेश में स्‍तनपान की दर अन्‍य प्रदेशों से कम

डीपीएम विनी‍त श्रीवास्‍तव बताते हैं कि नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसार प्रदेश में एक घंटे के अन्दर स्तनपान की दर अभी मात्र 25.2 प्रतिशत है जो कि काफी कम है। छह माह तक केवल स्तनपान की दर 41.6 फीसद है जो कि अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी कम है। संतकबीरनगर में होने वाले 64 प्रतिशत संस्‍थागत प्रसव में जन्‍म के पहले घण्‍टे में होने वाले स्‍तनपान की दर 23.8 प्रतिशत है। इसे बढ़ाने की जरुरत है। दूसरी तरफ पीएलओएस वन जर्नल रिपोर्ट ब्रेस्‍ट फीडिंग मेटोनालिसिस रिपोर्ट 2017 के अनुसार जन्म के पहले घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराने से नवजात मृत्यु दर में 33 फीसद तक कमी लायी जा सकती है। वहीं 2008 में हुए एक अन्‍य शोध के अनुसार छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 फीसद और 15 फीसद कमी लायी जा सकती है।

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