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सगे भाई विक्रम और आलोक की जिन्‍दगी संवार रहा आरबीएसके



■ 5 महीने के आलोक को क्‍लब फुट तो 7 वर्ष के विक्रम को है हृदय रोग
■ क्‍लब फुट से पीडि़त का हुआ आपरेशन, हृदय रोग का इलाज जारी
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। रेनू और बबलू की तीन संतानों में 7 साल के बड़े बेटे विक्रम को गंभीर हृदय रोग है, तो 5 महीने के आलोक को जन्‍मजात क्‍लब फुट की बीमारी है । दोनों के इलाज में लाखों का खर्च यह परिवार वहन ही नहीं कर सकता था। ऐसे में आरबीएसके (राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम ) टीम इस परिवार के लिए देवदूत बनकर उतरी। लाखों रुपए के अभाव में इलाज से वंचित इन दोनों बच्‍चों का इलाज प्रदेश के उच्‍च सुविधा युक्‍त चिकित्‍सालयों में हो रहा है।
खलीलाबाद ब्‍लाक के ग्राम सभा भेडि़या उर्फ बकरिया गांव के रेनू और बबलू कपड़ा‍ सिलकर अपने परिवार का भरण पोषण करते है। चार महीने पहले जब खलीलाबाद सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र से सम्‍बद्ध आरबीएसके टीम डॉ रचना यादव के नेतृत्‍व में प्राथमिक पाठशाला भेडि़या उर्फ बकरिया में बच्‍चों की जांच के लिए गई तो दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले 7 वर्षीय विक्रम के दिल की धड़कने टीम के चिकित्‍सकों को कुछ असामान्‍य सी लगीं। वहीं आंगनबाड़ी केन्‍द्र पर 1 महीने के बच्‍चे आलोक की जांच के दौरान पाया गया कि वह क्‍लब फुट (जन्‍मजात मुड़े हुए पैर ) का रोगी है। यही नहीं दोनों के माता पिता भी एक ही थे। इसके बाद टीम के सदस्‍यों डॉ मकीन, ज्‍योति शर्मा, छाया ने मिलकर इन दोनों बच्‍चों की जिले से लेकर गोरखपुर और लखनऊ तक जांच करवाई। साढ़े तीन माह पहले गोरखपुर मेडिकल कालेज से सम्‍बद्ध एक ख्‍यातिलब्‍ध चिकित्‍सक के यहां आलोक के क्‍लब फुट का आपरेशन हुआ और कई चरणों में लगातार हुआ है। अब उसका अन्तिम प्‍लास्‍टर लगाया गया है। राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम के जिला समन्‍वयक पिण्‍टू कुमार के प्रयासों का नतीजा रहा कि अगले शनिवार को फिर विक्रम जांच के लिए तीसरी बार लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कालेज जाएगा। वहां पर उसे आपरेशन की तारीख दी जाएगी तथा बेहतर चिकित्‍सकों की निगरानी में उसके हृदय का आपरेशन होगा।

बोले परिजन - हमारे लिए वरदान है आरबीएसके
रेनू और बबलू जो गांव में लोगों के कपड़े सिलकर गुजर बसर करते हैं, वे कहते हैं कि अगर आरबीएसके की टीम नहीं होती तो हम शायद अपने दोनों बच्‍चों का इलाज नहीं करा पाते। एक बच्‍चे का आपरेशन हो गया है। दूसरे की तैयारी चल रही है। लखनऊ और गोरखपुर दौड़ने के साथ लाखों रुपये का खर्चा हम कहां से वहन कर पाते। आरबीएसके हमारे लिए वरदान है।

अगर किसी बच्चे को हो ये रोग तो करे सम्पर्क

आरबीएसके समन्‍वयक पिण्‍टू कुमार ने बताया कि अगर कोई बच्‍चा जिसकी उम्र 19 साल तक हो और उसके अन्‍दर जन्‍मजात विकृति ओठ और तालू कटे हुए हों, नाक कान गला सम्‍बन्‍धी विकृति हो, या फिर हृदय और कार्निया से सम्‍बन्धित रोग अगर कभी भी पकड़ में आएं तो अपने सम्‍बन्धित सीएचसी व पीएचसी में चले जाएं, या फिर जिला चिकित्‍सालय पर चले आएं वहां पर पूछ लें कि राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम की टीम कहां बैठती है। हर ब्‍लाक में दो टीमें हैं, किसी भी टीम से सम्पर्क हो जाएगा तो उसका पूरा इलाज मुफ्त होगा।

‘‘राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम की टीम बेहतर कार्य कर रही है। इस टीम ने अभी तक दजनों रोगियों की जन्‍मजाज रोगों का इलाज कराया है। साथ ही साथ सैकड़ो बच्‍चों का इलाज प्रदेश के विभिन्‍न चिकित्‍सालयों में कराया गया है। यह सुविधा पूरी तरह से निशुल्‍क है। बालकों के हित को लेकर केन्‍द्र सरकार पूरी तरह से संकल्पित है। जिले में 19 साल से कम आयु के जो भी बच्‍चे आरबीएसके के अन्‍तर्गत आने वाले 38 बीमारियों से पीडि़त हैं वे आरबीएसके टीम से सम्‍पर्क कर सकते हैं।’’

डॉ हरगोविंद सिंह
मुख्य चिकित्साधिकारी

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