अखिलेश्वर तिवारी
बलरामपुर ।। जनपद बलरामपुर के कोतवाली नगर क्षेत्र के खलवा मोहल्ले में उस समय तनाव व्याप्त हो गया जब हिंदू दलित परिवार के एक लड़की को उसी मोहल्ले के एक मुस्लिम युवक द्वारा अपहरण कर लिया गया । 15 अगस्त के दिन घटित हुई इस घटना के बाद पूरे मोहल्ले में तनाव व्याप्त हो गया था । पुलिस की कार्यशैली भी काफी ढुलमुल रही जिसके कारण लोगों में और तनाव पनपता गया ।
मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा और उनके हस्तक्षेप के बाद कोतवाली नगर में मुकदमा सामान्य धाराओं में पंजीकृत किया गया । पुलिस के लचीले रवैया से खफा होकर हिंदू संगठनों ने आंदोलन की भी चेतावनी दे दी । मीडिया तथा हिंदू संगठनों के दबाव में नगर पुलिस ने आखिरकार एक सप्ताह बाद लड़की को बरामद कर न्यायालय में पेश किया ।
लड़की द्वारा न्यायालय में बयान के बाद न्यायालय ने परिजनों को सुपुर्द कर दिया । इस पूरी प्रक्रिया में एक ओर जहां पुलिस की भूमिका कदम कदम पर संदेह के घेरे में रही वही आर्य समाज के पांच रतन कहे जाने वाले युवा हिंदू नेताओं की अहम भूमिका रही जिनके प्रयास से ही पूरे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बरकरार रही और पुलिस को कार्रवाई करने पर मजबूर होना पड़ा । घर वापस आने के बाद पीड़ित लड़की तथा उसके परिवार वालों ने आज आर्य समाज की सदस्यता ग्रहण की । सदस्यता ग्रहण करने के बाद आर्य समाज के संयोजक अशोक कुमार आर्य द्वारा हवन पूजन कराकर पवित्रीकरण की प्रक्रिया संपन्न कराई गई ।
आर्य वीर दल के देवीपाटन मंडल संयोजक अशोक आर्य ने बताया आर्य समाज की स्थापना से पूर्व यदि कोई हिंदू अन्य मजहब स्वीकार कर लेता था अथवा अन्य मजहब का कोई स्त्री पुरुष हिंदू बनना चाहता था तो दोनों के लिए हिंदू मत के ठेकेदारों ने रास्ता बंद कर रखा था जिसके कारण अन्य मजहब वाले धर्मांतरण करके करोड़ों हिंदुओं को अपने मजहब में शामिल कर लिए । आज हिंदुस्तान में बसे हुए अधिकांश मुसलमान के पूर्बज हिंदू ही थे । अकबर बादशाह भी हिंदू बनना चाहता था लेकिन बीरबल जैसा बुद्धिमान व्यक्ति भी हिंदू ठेकेदारों की बातों पर विश्वास करके अपने कुतर्क के द्वारा उसे हिंदू नहीं बनने दिया । इसी प्रकार बंगाल का कालू चंद नामक हिंदू युवक जब वहां के मुस्लिम शासक की लड़की को लेकर शुद्धि के लिए काशी के धर्म आचार्यों से मिला तो सबने उसे स्वीकारने से साफ मना कर दिया जिसके कारण उसने वापस जाकर इस्लाम स्वीकार कर लिया ।
प्रतिदिन हजारों हिंदुओं की चोटी तथा जनेऊ काटकर उन्हें मुसलमान बनाता रहा तथा ना मानने पर उनकी गर्दन ही काट देता था । इस प्रकार वह काला चांद नाम से प्रसिद्ध होकर लाखों हिंदुओं को मुसलमान बनाया । हिंदुओं को बचाने का श्रेय केवल और केवल महर्षि दयानंद को जाता है जिन्होंने कृण्वंतो विश्वमार्यम् (सारे विश्व को आर्य अर्थात हिंदू बनाओ) वेद मंत्र का उद्घोष करके शुद्धि का डंका बजा दिया जिसकी आवाज से उधर मस्जिद और गिरजा घरों में हाहाकार मच गया । इधर मंदिरों में खलबली मच गई तथा हिंदू मुस्लिम और ईसाई तीनों मजहब के धर्म आचार्यों तथा देश के सभी शंकराचार्य ने महर्षि दयानंद का कड़ा विरोध किया । यहां तक कि उनके जान के प्यासे हो गए लेकिन हिंदू समाज ने महर्षि को स्वीकार कर लिया और लाखों मुसलमान व ईसाई हिंदू धर्म में वापस आ गए ।
जब महर्षि को जहर देकर मार डाला गया तो शुद्धि की कमान स्वामी श्रद्धानंद और पंडित लेखराम ने संभाली लेकिन मुसलमानों द्वारा जब उनकी भी हत्या कर कर दी गई तब हिंदुओं के धर्म आचार्यों की आंखें खुली और सब ने एक स्वर से आर्य समाज के शुद्धि आंदोलन को स्वीकार कर लिया । उन्होंने गीत के माध्यम से कहा कि
"दयानंद ने गर जगाई न होती, तो बेदार हरगिज खुदाई ना होतीl पता हिंदुओं का जहां में न मिलता
जो शुद्धि की बूटी पिलाई न होतीll"
उन्होंने बताया कि घर वापसी कार्यक्रम में एक सप्ताह अथक परिश्रम करने वाले आर्य वीर दल के डॉ तुलसी दुबे, संजय कुमार शुक्ला, सत्य प्रकाश शुक्ला, गौरव मिश्र तथा अंबरीश शुक्ल को पंच प्यारे उपाधि देते हुए सम्मानित भी किया गया । कार्यक्रम में पीड़िता एवं उसका परिवार तथा सेतुबंध त्रिपाठी, संजय तिवारी, अजय मिश्र, ओंकार तिवारी, हिमांशु मिश्र, हरीकान्त मिश्र, गोविंद भाई व सुशील आर्य सहित कई अन्य आर्य उपस्थित थे ।



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